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चाइनीज लाइट की रोशनी ने छीन ली कुम्हारों की खुशी, खत्म हो रही है दिए की परंपरा

अररिया के गाछी टोला की कुम्हार बस्ती में कारीगर लगातार मिट्टी के दिए बनाए जा रहे हैं. परंपरा को आज भी जिंदा रखे हुए हैं. लोगों के घरों को रौशन करने के लिए काम कर रहे हैं.

चाइनीज लाइट की रोशनी ने छीन ली कुम्हारों की खुशी, खत्म हो रही है दिए की परंपरा
मिट्टी के दिए के बाजार में मंदी. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

अररिया: अपनी मेहनत से दूसरे के घरों को रौशन करने वाले आज खुद ही मुफलिसी के अंधेरे में जीने के लिए मजबूर हैं. दिवाली नजदीक है. ऐसे में अररिया के कुम्हार बस्ती में कारीगर लगातार मेहनत कर रहे हैं, ताकि हर घर रौशन हो सके. लेकिन आंखों को चौंधिया देने वाली चाइनीज लाइट की रौशनी ने मिट्टी के दिए के बाजार को मंदा कर दिया है.

अररिया के गाछी टोला की कुम्हार बस्ती में कारीगर लगातार मिट्टी के दिए बनाए जा रहे हैं. परंपरा को आज भी जिंदा रखे हुए हैं. लोगों के घरों को रौशन करने के लिए काम कर रहे हैं.

मिट्टी के दिए बनाने में जुटे गणपत पंडित ने बताया कि पहले जितनी बिक्री होती थी अब उस हिसाब से कुछ भी नहीं बिकता. बस यही रोजगार ह, इसलिए किए जा रहे हैं. वहीं, कुम्हार खुशी लाल पंडित का मानना है कि इस परम्परा को हम ढो रहें है. क्योंकि लोगों के बीच मिट्टी के दिए की परम्परा धीरे-धीरे खत्म हो रही है.

दुसरे के घरों को रौशन करने वाले आज खुद ही लाचारी और मुफलिसी के अंधेरे में जीने को मजबूर हैं. मिट्टी के दिए की खरीददारी कम होने से इनके चेहरे पर मायूसी है. इनका मानना है कि इस परम्परा को आगे बढ़ाने की जरुरत है, ताकि भारतीय सभ्यता और परम्परा को कायम रखा जा सके.