प्रकाश जावड़ेकर ने ली मैथिली लिपि के सरंक्षण के लिए गठित समिति की पहली बैठक

अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार बनी थी उसी दौरान मैथिली भाषा को 8वीं अनुसूची में स्थान मिला था.

प्रकाश जावड़ेकर ने ली मैथिली लिपि के सरंक्षण के लिए गठित समिति की पहली बैठक
एचआरडी मंत्री प्रकाश जेवड़ेकर की अध्यक्षता में हुई पहली बैठक. (तस्वीर- Twitter)

नई दिल्ली/दरभंगा : मैथिली लिपि के संरक्षण, संवर्धन और विकास के लिए गठित विशेषज्ञ समिति की पहली बैठक गुरुवार को दिल्ली में हुई. केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में विशेषज्ञ समिति के चारों सदस्य के साथ बिहार राज्य योजना परिषद के सदस्य संजय कुमार झा भी शामिल हुए. बैठक में केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान के निदेशक भी मौजूद थे.

संजय झा ने कहा कि केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री ने आश्वस्त किया कि मिथिलाक्षर के संवर्धन और विकास के लिए सभी प्रकार की सहायता की जाएगी. साथ ही मंत्री ने समिति के सदस्यों को उनका काम में हर संभव मदद दी जाएगी. समिति की अगली बैठक 21 जुलाई को दरभंगा में होगी.

संजय कुमार झा ने कहा कि मिथिलाक्षर के संवर्धन के लिए हम सब लगातार काम कर रहे हैं और इस समिति को हर तरह की सहायता दी जाएगी. उन्होंने कहा कि बैठक में इस मुद्दे पर भी चर्चा हुई कि मैथिलि लिपि को पढ़ने वाले लोग कम हैं, ऐसे में लिपि के संरक्षण, संवर्धन और विकास से अधिक से अधिक लोग इस लिपि को पढ़ सकेंगे. उन्होंने कहा कि मैथिलि लिपि में पचास हजार से अधिक पांडुलिपि हैं, जिन्हें पढ़ने वाले आज गिनती मात्र के बचे हैं.

अटल बिहारी वाजपेयी के योगदान को याद करते हुए संजय झा ने कहा कि जब पहली एनडीए की सरकार बनी थी उसी दौरान मैथिली भाषा को 8वीं अनुसूची में स्थान मिला था. ऐसे में मैथिलि लिपि के संरक्षण और संवर्धन के लिए बनी इस समिति से लोगों को लाभ मिलेगा.

इस विशेषज्ञ समिति में ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के मैथिली विभाग के विभागाध्यक्ष व प्रोफेसर डॉ रमण झा, दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के व्याकरण विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ पं. शशिनाथ झा, ललित नाराय़ण विश्वविद्यालय के सेवानिवृत प्रोफेसर डॉ रत्नेश्वर मिश्रा, पटना स्थित महावीर मंदिर न्यास के प्रकाशन विभाग के पदाधिकारी पं. भवनाथ झा शामिल हैं.

गौरतलब है कि संजय झा ने 19 मार्च, 2018 को इस मुद्दे पर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से दिल्ली में उनके दफ्तर में मुलाकात कर मैथिली लिपि के संरक्षण, संवर्धन और विकास को लेकर एक ज्ञापन सौंपा था.