झारखंड में ST-SC, OBC आरक्षण में बदलाव की तैयारी, हेमंत सोरेन सरकार बढ़ाएगी कोटा

वहीं सरना धर्म कोड को लेकर भी सरकार जल्द कोई अहम फैसला ले सकती है. जहां सोरेन सरकार ने आरक्षण में बदलाव की दिशा में काम करना शुरू कर दिया है. सरकार के इस फैसले को विपक्ष उपचुनाव से जोड़कर देख रही है. 

झारखंड में ST-SC, OBC आरक्षण में बदलाव की तैयारी, हेमंत सोरेन सरकार बढ़ाएगी कोटा
झारखंड में ST-SC, OBC आरक्षण में बदलाव की तैयारी, हेमंत सोरेन सरकार बढ़ाएगी कोटा.

रांची: झारखंड में एक बार फिर आरक्षण की सियासत शुरू होने वाली है. हेमंत सोरेन (Hemant Soren) सरकार ने राज्य की नौकरियों में ST-SC और OBC कोटे में बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है. सोरेन सरकार ने समाज के इन वर्गों के लिए आरक्षण का दायरा बढ़ाने का फैसला किया है. 

झारखंड उपचुनाव (Jharkhand by-election) से पहले आरक्षण में बदलाव की इस तैयारी को लेकर सियासत भी शुरू हो गयी है.

झारखंड उपचुनाव से पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आरक्षण का शिगूफा छोड़ने से राज्य का सियासी पारा चढ़ने लगा है. सोरेन सरकार ने OBC का आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का फैसला किया है. जबकि अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षण प्रतिशत 26 से बढ़ाकर 28 प्रतिशत और अनुसूचित जाति के लिए आरक्षण प्रतिशत 10 से बढ़ाकर 12 प्रतिशत करने की तैयारी है. 

वहीं सरना धर्म कोड को लेकर भी सरकार जल्द कोई अहम फैसला ले सकती है. जहां सोरेन सरकार ने आरक्षण में बदलाव की दिशा में काम करना शुरू कर दिया है. सरकार के इस फैसले को विपक्ष उपचुनाव से जोड़कर देख रही है. 

हालांकि मुख्यमंत्री का हेमंत सोरेन तर्क है कि आरक्षण का बढ़ना पहले से तय था और ये आम चुनाव नहीं है जिसकी वजह से सरकार का काम रूका रहेगा. उन्होंने कहा कि सरना धर्म कोड भी लागू करने को लेकर सरकार सहमत है और इस पर जल्द निर्णय लिया जाएगा.

वहीं सोरेन सरकार के झारखंड में आरक्षण प्रतिशत बढ़ाने के फैसले पर विपक्ष भड़क उठा है. झारखंड बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश के मुताबिक बीजेपी के मुताबिक उपचुनाव में अपनी हार को देख कर सरकार हड़बड़ा गयी है...और हड़बड़ाहट में अजीबोगरीब फैसले ले रही है.

झारखंड उपचुनाव में बेहद कम वक्त बचा है. ऐसे वक्त में सोरेन सरकार के राज्य में आरक्षण में बदलाव के फैसले को लेकर सवाल उठने लाजिमी है. सरकार भले तर्क दे रही हो कि फैसले को चुनाव से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए, लेकिन विपक्ष इस तर्क को खारिज कर रहा है. अब जनता इस तर्क को स्वीकार करती है या नहीं, ये भी 10 नवंबर तक साफ हो जाएगा.
EDITED BY - लीना सिंह