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थम गई है झारखंड पुलिस के गाड़ियों की रफ्तार, पब्लिक को देना पड़ता है जीप में धक्का

राजधानी रांची में आए दिन क्राइम के ग्राफ् में इजाफा हो रहा है वहीं दूसरी ओर पुलिस की गाड़ियों की रफ्तार ही पब्लिक भरोसे है. 

थम गई है झारखंड पुलिस के गाड़ियों की रफ्तार, पब्लिक को देना पड़ता है जीप में धक्का
पुलिस को पब्लिक की मदद लेनी पड़ रही है ताकि उनकी गाड़ी स्टार्ट हो सके

कामरान, रांची: यूं तो झारखंड पुलिस का स्लोगन है- 'सेवा ही लक्ष्य है' लेकिन राजधानी रांची में पुलिस को ही पब्लिक द्वारा सेवा की जरूरत नजर आ रही है. राजधानी रांची में आए दिन क्राइम के ग्राफ में इजाफा हो रहा है वहीं दूसरी ओर पुलिस की गाड़ियों की रफ्तार ही पब्लिक भरोसे है. 

एक तरफ जहां क्राइम पर अंकुश लगाने को लेकर पुलिस को संसाधनों और नई तकनीकों से लैस किया जा रहा है वहीं दूसरी तरफ डोरंडा थाने की पुलिस वैन के पहिये थम गई हैं .आलम यह है पुलिस को पब्लिक की मदद लेनी पड़ रही है ताकि उनकी गाड़ी स्टार्ट हो सके. जी हां गाड़ी को चलाने के लिए पुलिस को गाड़ी में धक्का लगाने के लिए लोगों की मदद लेनी पड़ती है 

डोरंडा थाना के प्रभारी जिस गाड़ी में चलते हैं उसकी बैटरी और सेल्फ में दिक्कत आ गई है. जिसकी वजह से पहले तो पुलिस वालों ने गाड़ी में धक्का लगाया लेकिन आखिर में आम आदमी को धक्का देने के लिए बुलाया गया. तब जाकर कहीं गाड़ी स्टार्ट हुई और चली. 

सोचने वाली बात है कि आम लोगों की सुरक्षा करने वाली पुलिस के गाड़ियों का अगर यह हाल होगा तो पुलिस समय पर कैसे पहुंचेगी और अपराधियों को पकड़ने में कैसे सफल होगी.