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रघुवर सरकार के प्रयास से जमशेदपुर की तलहटी में बसे टांगराइन गांव में तैयार हो रहे तीरंदाज

 ये झारखंड का पहला सरकारी स्कूल है जहां बच्चों को तीरंदाजी सिखाई जा रही है. 

रघुवर सरकार के प्रयास से जमशेदपुर की तलहटी में बसे टांगराइन गांव में तैयार हो रहे तीरंदाज

रांची: सब पढ़े, सब बढ़े. इसी मंत्र के साथ रघुवर सरकार झारखंड में काम रही है और बड़ी बात ये है कि सरकार की इस मुहिम में सरकारी स्कूल के शिक्षक भी जुड़ रहे हैं. आगे बढ़कर छात्रों को उनकी मंजिल तक पहुंचाने में लगे हैं. ऐसा ही प्रयास हो रहा है. जमशेदपुर की तलहटी में बसे टांगराइन गांव में.  

ये सरकारी स्कूल के तीरंदाज है. इनकी एकाग्रता और समर्पण ही इनकी मंजिल है. जमशेदपुर से 40 किलोमीटर दूर ओडिशा के सीमा पर पहाड़ की तलहटी में बसा है. टांगराइन गांव. ये झारखंड का पहला सरकारी स्कूल है जहां बच्चों को तीरंदाजी सिखाई जा रही है. अपग्रेड मिडिल स्कूल के प्रभारी प्रिंसिपल ने आसपास के गांव में शिक्षा के लिए लोगों को जागरुक किया और आज इस स्कूल में 2 सौ 22 बच्चे पढ़ते हैं और तीरंदाजी सिखते हैं. बच्चे बड़े होकर दीपिका और मधुमिता जैसे मेडल जीतकर अपने गांव का नाम रोशन करना चाहते हैं.

एक छात्र ने बताया कि गांव का नाम रौशन करने के लिए हम तीरंदाजी सीख रहें हैं. दूसरे छात्र का कहना है कि तीरंदाजी इसलिए सीख रहें हैं कि आगे चलकर अच्छी तीरंदाजी करना चाहते है. जैसे दूर-दूर से खिलाड़ी आते हैं तीरंदाजी करने के लिए. मैं भी सीखना चाहता हूं जिससे स्कूल का नाम रौशन कर सकें और गोल्ड मेडल जीतकर लाएं. 

 

 

प्रभारी प्रधानाध्यापक अरविंद तिवारी का कहना है कि कि इस खेल को काफी मान्यता है और इस खेल में हमारे झारखंड के काफी बच्चों ने नाम भी रोशन किया है देश का. तो मैं चाहता हूं कि हमारे स्कूल के बच्चे भी इल खेल को अपनाए और देश का नाम रोशन करें. 

स्कूल में स्वच्छता के साथ साथ पर्यावरण संतुलन का भी पूरा ध्यान रखा जाता है. इस स्कूल की अपनी वेबसाइट भी है. रघुवर सरकार ने खेल को बढ़ावा देने के लिए सभी ब्लॉक में खेल क्लब की शुरुआत की है जिसके जरिए खिलाड़ियों की प्रतिभा पहचानी जा रही है. ग्रामीण का कहना है कि बाहर के अच्छा-अच्छा खेल कर आते हैं लेकिन सुदूर ग्रामीण क्षेत्र से नहीं जा पाते हैं लेकिन तिवारी सर के प्रयास से सुदूर ग्रामीण क्षेत्र में भी तीरंदाजी प्रशिक्षण केंद्र खोला गया. पिछड़े इलाके का ये सरकारी स्कूल किसी भी निजी स्कूल से कम नहीं है. बिल्डिंग भले ही बड़ी ना हो लेकिन बच्चों के हौसले किसी से कम नहीं हैं.  

(Exclusive Feature)