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पटना: लोग बारिश से बेहाल, जलजमाव और मेनहोल की वजह से घरों से निकलना मुश्किल

इस बारिश को मुश्किल नगर निगम औऱ नगर विकास विभाग ने बनाया. व्यवस्था दुरूस्त करने के हजारों दावों और वादों के बीच पटना के कई इलाके चार दिनों से जलमग्न हैं और कोई भी विभाग यहां अपनी ड्यूटी के लिए नहीं पहुंचा.

पटना: लोग बारिश से बेहाल, जलजमाव और मेनहोल की वजह से घरों से निकलना मुश्किल
दो दिनों की लगातार बारिश में लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो गया.

पटना: बिहार की राजधानी पटना में बारिश अब लोगों के लिए मुश्किल का सबब बनने लगी है. दरअसल इस बारिश को मुश्किल नगर निगम और नगर विकास विभाग ने बनाया. व्यवस्था दुरूस्त करने के हजारों दावों और वादों के बीच पटना के कई इलाके चार दिनों से जलमग्न हैं और कोई भी विभाग यहां अपनी ड्यूटी के लिए नहीं पहुंचा.

अगर आप मीठापुर बस स्टैंड जाते हैं तो सावधान रहें क्योंकि ये जगह फिलहाल खतरे से खाली नहीं है.कई कॉलोनी में मेनहोल खुले पड़े हैं लेकिन इस पर ढ़क्कन नहीं लगाया गया है. राजधानी पटना को स्मार्ट बनाया जा रहा है. अरबों रूपए खर्च हो रहे हैं. लेकिन बिहार के सबसे बड़े शहर की दुर्दशा पर हर कोई शर्मिदां और हैरान है.लोग बारिश के लिए भगवान से प्रार्थना कर रहे थे लेकिन जब इंद्रदेव ने बरसना शुरू किया तो दो दिनों के बाद ही राजधानी के लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो गया.

शायद ही पटना का कोई ऐसा इलाका हो जहां पर अभी भीषण जलजमाव नहीं हो. गांधी मैदान ,एसकेपुरी,यारपुर,मीठापुर,कंकड़बाग जैसे इलाकों में घुटने भर पानी चल रहा है. गांधी मैदान से एग्जिबिशन रोड जाने वाली राह पर एक फुट से ज्यादा पानी बह रहा है. और इन पानी में कहीं मेनहोल हो तो समझिए की आपकी जान सिर्फ भगवान ही बचा रहे हैं.कायदे से यहां जलजमाव हटाने के लिए सुपरशकर मशीन होनी चाहिए थी.

निगम और नगर विकास विभाग के अधिकारी और कर्मचारी होने चाहिए थे लेकिन इन इलाकों में दोनों विभाग का कोई भी कर्माचरी तक नहीं दिखा. पटना जंक्शन के ऊपर से गुजरने वाली ओवर ब्रिज के बाद जैसे ही आप उतरते हैं तो यहां से आपको मीठापुर बस स्टैंड पहुंचने में एक घंटे से कम का समय नहीं लगता है. यहां दो से तीन फुट तक पानी की लहरे हैं ऐसा लगता है थोड़ी देर बाद समंदर शुरू होने वाला है.

यहां पर भी पानी को हटाने के लिए न तो निगम और न ही नगर विकास विभाग के कर्मचारी दिखे.जलजमाव के साथ भीषण जाम राहगीरों और यात्रियों को मीठापुर बस स्टैंड पहुंचाने में और मुश्किल पैदा कर रहा है. मीठापुर बस स्टैंड के अंदर जलममाव के साथ कीचड़ भी. यात्रियों की मजबूरी है बस पकड़ने की. मीठापुर से बिहार के मुजफ्फपुर, सीतामढ़ी, मधुबनी, दरभंगा, बेतिया, बगहा, मोतिहारी, समस्तीपुर सहित दूसरे जिलों के लिए बस खुलती है.

लेकिन जो निगम बेहतर इंतजाम के दावे कर रहे हैं उसके कोई जिम्मेदारी अधिकारी मीठापुर आकर इसके हालात देख सकते हैं. निगम ने इस बार नालों की उड़ाही के लिए सभी वार्डों को 25-25 लाख रूपए दिए थे लेकिन क्या इतने पैसे से नालियां साफ हो सकती थी. यात्रियों और आम लोग निगम और सरकार दोनों से नाराज हैं.

जरा सोचिए अगर मीठापुर जैसे इलाके में अगर कोई हादसा होता है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा. क्या निगम या नगर विकास विभाग इस पर कोई कार्रवाई करेगा. पटना में मेन होल अब भी खुले हैं और इन सबके बीच निगम में उपमहापौर की कुर्सी पाने के लिए पार्षदों में शह और मात का खेल जारी है. जनता का क्या होगा इसके लिए कोई बोलने के लिए तैयार नहीं है.