उच्च शिक्षा में झारखंड ने बिहार को छोड़ा पीछे, 20.9 प्रतिशत रहा ग्रॉस इनरोलमेंट रेशियो
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उच्च शिक्षा में झारखंड ने बिहार को छोड़ा पीछे, 20.9 प्रतिशत रहा ग्रॉस इनरोलमेंट रेशियो

Jharkhand Samachar: 18 से 23 साल के छात्र-छात्राओं के उच्च शिक्षा के मामले में झारखंड की स्थिति बिहार से बेहतर है.

 उच्च शिक्षा में झारखंड ने बिहार को छोड़ा पीछे, 20.9 प्रतिशत रहा ग्रॉस इनरोलमेंट रेशियो

Ranchi: शिक्षा मंत्रालय की ऑल इंडिया सर्वे ऑन हायर एजुकेशन की 2019-20 की रिपोर्ट के मुताबिक, झारखंड में भी एक बड़ा हिस्सा छात्रों का है जो 12वीं पास करने के बाद या तो पढ़ाई छोड़ देते हैं या फिर उच्च शिक्षा के लिए माइग्रेट कर जाते हैं. 

हालांकि, आंकड़ों के लिहाज से देखें तो अच्छी बात ये है कि 18 से 23 साल के छात्र-छात्राओं के उच्च शिक्षा के मामले में झारखंड की स्थिति बिहार से बेहतर है. HISHE की 19-20 की रिपोर्ट को आधार मानें तो राष्ट्रीय औसत 27.1% है जबकि झारखंड का ग्रॉस इनरोलमेंट रेशियो 20.9 प्रतिशत है.

इस मामले में शिक्षाविद प्रो रमेश शरण का कहना है कि 'उच्च शिक्षा और ग्रॉस एनरोलमेंट के मामले में झारखंड बिहार से बेहतर रहा है, संस्थाएं यहां की बेहतर है. उच्च शिक्षा में यहां अच्छे संस्थान रहे हैं, शिक्षा का एक वातावरण रहा है. अच्छे कॉलेज होने के कारण बिहार से भी छात्र पढ़ने आते हैं.' 

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उन्होंने आगे कहा कि 'झारखंड में जिनको जाना है वो तो चले ही जाते हैं पर झारखंड की अधिकांश जनसंख्या आदिवासी दलित लड़कियां हैं उनको लोग बाहर जाने नहीं देना चाहते हैं, खर्च नहीं करना चाहते हैं, ऐसे में जो यहां रहते हैं और पढ़ते हैं उनकी कोशिश होती है कि एमए तक की पढ़ाई कर ही लें. इसकी वजह से तुलनात्मक उच्च शिक्षा में ड्राप आउट कम है.'

वहीं, शिक्षाविद हरीश्वर दयाल बताते हैं, 'झारखंड बिहार की तुलना में बेहतर रहा है. पिछले साल यानी 18-19 के वर्ष से तुलना करें तो झारखंड की स्थिति इस मामले में बेहतर हुई है. देश के औसत से करीब उतना ही पीछे हैं जितना पहले थे. उसको मेकप करने की आवश्यकता है. स्कूल की तो यहां अच्छी शिक्षा है ही पर हायर एज्युकेशन के लिए कम संस्थान हैं. बहुत से बच्चे यहां से बाहर चले जाते हैं. यहां से हायर एजुकेशन में ड्रॉप आउट भी होता है. 12वीं करने के बाद बहुत से बच्चे हायर एज्युकेशन नहीं कर पाते हैं इसलिए ग्रॉस इनरोलमेंट रेशियो हायर एज्युकेशन का हमारा देश की औसत से नीचे है.'

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