पटना बुक फेयर में पाकिस्तानी लेखकों की धूम, पाठकों को पसंद आ रही है उनकी किताबें

गुलाबी ठंड और गुनगुनी धूप के बीच हरियाली में पसरी किताबों की दुनिया में दिनभर पाठकों की आवाजाही बनी रहती है. हर स्टॉल पर पाठकों की कतार लगी है

पटना बुक फेयर में पाकिस्तानी लेखकों की धूम, पाठकों को पसंद आ रही है उनकी किताबें
पटना बुक फेयर में पाठकों को पसंद आ रही है पाकिस्तानी लेखकों की किताबें.

पटना: भारत-पाकिस्तान के बीज भले ही हालात ठीक नहीं हो, लेकिन इसका असर पटना के पुस्तक मेले (Patna Book Fair) पर नहीं दिख रहा है. पुस्तक मेले में पाकिस्तानी लेखकों के द्वारा लिखी गई पुस्तक को पटना के पाठक काफी पसंद कर रहे हैं. पाठकों की मानें तो पुस्तक किसी भी लेखक के द्वारा लिखी गई हो उसे पढ़ने से ज्ञान मिलता है. कई पाठक यह भी कह रहे हैं कि पाकिस्तानी लेखकों के द्वारा लिखी गई पुस्तक इसलिए पढ़ना जरूरी होता है कि वह अपनी पुस्तक में हमारे देश के बारे में क्या लिखते हैं. भारत के बारे में उनकी सोच क्या है.

गुलाबी ठंड और गुनगुनी धूप के बीच हरियाली में पसरी किताबों की दुनिया में दिनभर पाठकों की आवाजाही बनी रहती है. हर स्टॉल पर पाठकों की कतार लगी है. देर शाम तक पुस्तक प्रेमी अपनी मनपसंद किताबें खोजते दिख रहे हैं. किस्से-कहानी, कविता, निबंध, उपन्यास, स्त्री विमर्श, दलित विमर्श के साथ प्रतियोगिता परीक्षा की पुस्तकों के बीच पुस्तक प्रेमी खोए रहते हैं.

इन सबके बीच ऐसे भी पाठक हैं जो पाकिस्तानी लेखकों की किताबों को काफी पसंद कर रहे हैं. वहीं, पुस्तक विक्रेताओं का कहना है कि पाकिस्तानी पुस्तक की डिमांड पटना के पुस्तक मेले में काफी है.

पाठक पुस्तक का प्रेमी होता है. वह यह नहीं देखता कि पुस्तक का लेखक मित्र देश का है या दुश्मन देश का. यही कारण है कि पाठक ज्ञान की तलाश में इन पुस्तकों को पढ़ने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं.