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उपचुनाव : किशनगंज सीट पर दिलचस्प हुई लड़ाई, कांग्रेस, AIMIM के बागियों ने भरा पर्चा

किशनगंज विधानसभा सीट कांग्रेस के लिए हमेशा से सुरक्षित सीट मानी जाती है. इस विधानसभा में 65 फीसदी मुस्लिम और 35 फीसदी हिन्दू वोटर हैं. 

उपचुनाव : किशनगंज सीट पर दिलचस्प हुई लड़ाई, कांग्रेस, AIMIM के बागियों ने भरा पर्चा
किशनगंज सीट पर कांग्रेस और AIMIM के बागियों ने किया नॉमिनेशन. (फाइल फोटो)

किशनगंज: बिहार के किशनगंज (Kishanganj) विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस और AIMIM पार्टी दोनों ही के सामने बागियों ने बड़ी मुश्किल परिस्थिति पैदा कर दी है. वहीं, वर्षों से इस सीट पर कब्जा जमाने की कोशिश में बीजेपी के लिए सुनहरा अवसर माना जा रहा है. AIMIM पार्टी से टिकट के दावेदार तसीर उद्दीन ने टिकट नहीं दिए जाने पर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में पर्चा भरकर अपनी पार्टी के खिलाफ बिगुल फूंक दिया है. 

वहीं, कांग्रेस (Congress) के टिकट के प्रबल दाबेदार माने जा रहे इमरान आलम को भी टिकट से महरीम रहना पड़ा. वह भी निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनावी जंग में कूद पड़े हैं. किशनगंज में 21 अक्टूबर को मतदान होना है. माना जा रहा है कि ये बागी नेता इस सीट को प्रभावित कर सकते हैं.

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किशनगंज विधानसभा सीट कांग्रेस के लिए हमेशा से सुरक्षित सीट मानी जाती है. इस विधानसभा में 65 फीसदी मुस्लिम और 35 फीसदी हिन्दू वोटर हैं. इस बार विधानसभा उपचुनाव में चार राजनीतिक दल के प्रत्याशी और चार निर्दलीय उम्मीदवार चुनावी दंगल में कूद पड़े हैं. यहां बीजेपी और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला अब तक होते आया है. अंत में लड़ाई कांग्रेस ही जीतती है. 2015 विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस के डॉ मोहम्मद जावेद आजाद ने बीजेपी के स्विटी सिंह को भारी मतों से हराया था. जावेद के सांसद चुने जाने के बाद यह सीट खाली हो गई.

सांसद मोहम्मद जावेद आजाद अपनी मां को कांग्रेस पार्टी की टिकट पर चुनाव लड़वा रहे हैं. कांग्रेसी नेता इमरान आलम निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपना भाग्य आजमा रहे हैं. इनका कहना है कि कांग्रेस में परिवारवाद को खत्म करने के लिए चुनावी मैदान में हैं.

वहीं, AIMIM के पूर्व उम्मीदवार तसीर उद्दीन को टिकट नहीं मिलने पर समर्थकों ने प्रदेश कार्यालय में तोड़फोड़ कर दिया. बागी तासीर ने भी निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में पर्चा दाखिल कर दिया है. तसीर उद्दीन ने अपने प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान पर पैसे लेकर टिकट बांटने का आरोप लगाया है.

हलांकि कांग्रेस और AIMIM अपने रूठे हुए नेताओं को जल्द मना लेने का दावा कर रही है. साथ ही कहा कि रूठना बड़ी बात नहीं है. कल साथ थे और आने वाले दिनों में भी पार्टी का साथ जरुर देंगे.