झारखंड में पाला बदले वाले नेताओं की लंबी है फेहरिस्त, चुनाव में खेल बिगाड़ सकते हैं बागी

कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और लोहरदगा से कांग्रेस के वर्तमान विधायक को बीजेपी ने लोहरदगा सीट से पार्टी का उम्मीदवार बनाया है.

झारखंड में पाला बदले वाले नेताओं की लंबी है फेहरिस्त, चुनाव में खेल बिगाड़ सकते हैं बागी
झारखंड विधानसभा चुनाव में बागी बिगाड़ सकते हैं खेल.

रांची: झारखंड के चुनावी माहौल में नेताओं के दल बदलने का सिलसिला लगातार जारी है. ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव (Jharkhand Assembly Elections 2019) में क्या दल बदलने वाले नेता या दल से नाराज बागी नेता एक दूसरे का खेल बिगाड़ते दिख सकते हैं. एक तरफ दूसरे दलों से पांच से अधिक विधायकों को बीजेपी ने अपने दल में शामिल कराकर उम्मीदवार बनाया. वहीं, बीजेपी और कांग्रेस से नाराज नेताओं को आजसू (AJSU) ने अपने दल में शामिल कराया. दर्जन भर नेता ठीक चुनाव से पहले एक दल छोड़ दूसरे दल में शामिल हुए हैं.

सुखदेव भगत- कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और लोहरदगा से कांग्रेस के वर्तमान विधायक को बीजेपी ने लोहरदगा सीट से पार्टी का उम्मीदवार बनाया है. इनके शामिल होने से नाराज लोहरदगा के बीजेपी जिलाध्यक्ष समेत कई नेता कांग्रेस में शामिल हो गए.

मनोज यादव- बरही विधानसभा से कांग्रेस विधायक ने बीजेपी का दामन थामा और बीजेपी ने उन्हें बरही से उम्मीदवार बनाया. इनके बीजेपी में शामिल के बाद बरही सीट से बीजेपी के दावेदार उमाशंकर अकेला ने कांग्रेस का दामन थामा है. कांग्रेस ने मनोज यादव के खिलाफ उन्हें मैदान मे उताड़ दिया है.

कुणाल षाड़ंगी- बहरागोड़ा से जेएमएम विधायक ने बीजेपी का दामन थामा और बीजेपी ने इसबार उम्मीदवार भी बनाया है. बीजेपी से उम्मीदवारी की दावेदारी कर रहे शमीर मोहंती ने टिकट के लिए जेएमएम ज्वॉइन कर लिया है.

जेपी पटेल- मांडू से जेएमएम विधायक जेपी पटेल ने बीजेपी का दामन थामा और बीजेपी ने उन्हें उम्मीदवार बनाया है.

भानु प्रताप शाही- जवान संघर्ष मोर्चा का बीजेपी में विलय करते हुए बीजेपी का दामन थामा. बीजेपी ने भवनाथपुर से इस चुनाव में उन्हें उम्मीदवार बनाया है. पूर्व विधायक बीजेपी से उम्मीदवारी के लिए दावेदारी कर रहे थे. टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर निर्दलीय नामांकन किया है. 

राधाकृष्ण किशोर- छतरपुर से वर्तमान में बीजेपी के विधायक हैं, लेकिन टिकट कटने से नाराज होकर आजसू का दामन थामा है. आजसू ने उन्हें उम्मीदवार भी बनाया है.

प्रदीप बलमुचू- कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व सांसद को कांग्रेस ने घाटशिला से उम्मीदवार नहीं बनाया, जिससे नाराज होकर उन्होंने आजसू का दामन थाम लिया. घाटशिला सीट महागठबंधन में जेएमएम के खाते में चली गई. उन्हें उम्मीद है कि इस चुनाव में आजसू उन्हें घाटशिला से चुनाव लड़ने का मौका जरूर देगी.

रांची में कोंग्रेस नेता कांके औरर हटिया से उम्मीदवार बदलने को लेकर प्रदेश कार्यालय में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. चाईबासा में जिला कांग्रेस कमेटी ने एक साथ इस्तीफा दे दिया. सीट बंटवारे और उम्मीदवार के चयन के खिलाफ उन्होंने यह कदम उठाया है.

विकास मुंडा- तमाड़ से आजसू विधायक ने जेएमएम का दामन थामा है.

अकील अख्तर- पाकुड़ से जेएमएम के पूर्व विधायक अकील अख्तर ने टिकट नहीं मिलने के कारण आजसू का दामन थाम लिया.

विष्णु भैया- जामताड़ा से पूर्व विधायक और बीजेपी नेता टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर बीजेपी से सारे रिश्ते खत्म करने के साथ बीजेपी को नुकसान पहुंचाने की बात कह रहे हैं.

चुनाव के समय दल बदलने और टिकट नहीं मिलने के कारण बागी हुए नेताओं के असर डालने पर बीजेपी प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि बीजेपी विश्व की सबसे बड़ी पार्टी है. सबसे अधिक नेता और कार्यकर्ता हमारे पास हैं. हमारे यहां और दूसरे दलों में सिर्फ यह फर्क है कि हमारे यहां विचारधारा चुनाव लड़ती है. यहां व्यक्ति विशेष का कोई फर्क नहीं पड़ता. समय-समय पर नेताओं की जिम्मेदारियां बांटती है. एकबार टिकट नहीं मिलने से अगर किसी दूसरे दल में चले जाते हैं तो ऐसे नेता सिर्फ व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए काम करते हैं.