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बिहार में आपदा पर बीजेपी नेताओं ने कहा 'खाना पीना छोड़ दे क्या?', RJD ने मांगा इस्तीफा

जेडीयू ने भी जहां बीजेपी के इस कारनामे पर सवाल खड़ा किया है. वहीं, आरजेडी ने नीतीश कुमार से अपील की है कि वो ऐसे संवेदनहीन मंत्रियों को मंत्रीमंडल से बर्खास्त करें. 

बिहार में आपदा पर बीजेपी नेताओं ने कहा 'खाना पीना छोड़ दे क्या?', RJD ने मांगा इस्तीफा
बीजेपी नेताओं के विवादित बयान पर सियासत गरम हो गई है.

पटनाः बिहार में एक तरफ 25 लाख लोग बाढ़, भूख और बीमारी से जूझ रहे हैं. वहीं, बिहार सरकार के बीजेपी कोटे के मंत्रियों, विधायकों ने बुधवार को फिल्म देखकर अपना मनोरंजन किया. इतना ही नहीं जब उन नेताओं से उनके फिल्म देखने पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने ये कहकर पल्ला झाड़ लिया कि बाढ़ आयी है तो क्या खाना पीना छोड दें. बीजेपी नेताओं के इस बयान पर सियासी गलियारे में बड़ी बहस छिड़ गई है.

जेडीयू ने भी जहां बीजेपी के इस कारनामे पर सवाल खड़ा किया है. वहीं, आरजेडी ने नीतीश कुमार से अपील की है कि वो ऐसे संवेदनहीन मंत्रियों को मंत्रीमंडल से बर्खास्त करें. जिन्हें आपदा के वक्त मनोरंजन सूझ रहा है.

बीजेपी कोटे के मंत्रियों और विधायकों के फिल्म देखने के मामले ने तूल पकड़ लिया है. चर्चा इस बात की हो रही है कि आपदा के वक्त बीजेपी कोटे के विधायकों और मंत्रियों का फिल्म देखना कितना सही है. दरअसल बीजेपी विधानमंडल दल के नेता सुशील मोदी के नेतृत्व में कई विधायकों और बीजेपी कोटे के मंत्रीयों ने बुधवार को पटना के एक मल्टीप्लेक्स में सुपर 30 फिल्म देखी. सुपर 30 संस्थान चलानेवाले गणितज्ञ आनंद की जीवनी पर आधारित फिल्म को बिहार सरकार ने टैक्स फ्री किया है.

फिल्म के अच्छे मैसेज को देखते हुए सरकार की ओर से फिल्म को प्रोत्साहन देने के लिए ऐसा फैसला लिया गया है. यही वजह रही कि फिल्म को प्रमोट करने के लिए बिहार के डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने बीजेपी के विधायकों और मंत्रियों ने एक साथ फिल्म देखी. लेकिन फिल्म खत्म होने के बाद जब पटना के विधायक अरुण सिन्हा और बीजेपी एमएलसी अवधेश सिंह से बाढ़ को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि बाढ़ आयी है तो क्या खाना पीना छोड दें.

बीजेपी नेताओं के बयान और फिल्म देखने को जेडीयू ने सही नहीं ठहराया है. जेडीयू विधायक रवि ज्योति ने कहा है कि बीजेपी के साथियों में मामले में संवेदनशीलता बरतनी चाहिए थी. पूरा बिहार आपदा से जूझ रहा है ऐसे में अगर वो संयम बरतते तो बेहतर होता. वहीं, जेडीयू कोटे के मंत्री अशोक चौधरी ने भी फिल्म को लेकर बीजेपी के नेताओं के बयान पर आपत्ति जतायी है. जबकि, जेडीयू कोटे के मंत्री श्याम रजक ने कहा है कि ये सबका अपना व्यक्तिगत फैसला होता है. सीएम नीतीश कुमार बाढ़ पीडितों की मदद में लगे हुए हैं.  

इधर फिल्म देखने वालों की टीम में शामिल बीजेपी कोटे के मंत्री विनोद सिंह ने सफाई दी है. मंत्री ने कहा है कि फ़िल्म कोई रंगरलियां वाली नही थी. फ़िल्म गरीब बच्चों को आईआईटीयन बनाने पर थी. फ़िल्म देखने में कोई बुराई नही. सरकार बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए पहले से ज्यादा मजबूती से काम कर रही है.

पूरे मामले का दिलचस्प पहलू ये है कि आपदा के वक्त फिल्म देखने के फैसले को लेकर बीजेपी मंत्रियों का एक समूह ऐसा भी था जिसे फिल्म देखना सही नहीं लगा. मंत्री प्रेम कुमार ऐसे ही मंत्रियों में रहे. मंत्री प्रेम कुमार ने खुले तौर पर कहा कि फिल्म देखने का फैसला किसका था मुझे नहीं मालूम. चूंकि विधानसभा चल रहा है और विभागीय काम बहुत ज्यादा है इसलिए मेरे लिए फिल्म देखना संभव नहीं.  

इस पूरी कवायद के बीच आरजेडी ने नीतीश कुमार से बडी मांग कर दी है. आरजेडी विधायक सरबजीत ने कहा है कि यहां बाढ में बच्चे मर रहे हैं और बीजेपी कोटे के मंत्री फिल्म देख रहे हैं इससे बडा संवेदनहीन मामला कुछ नहीं हो सकता. नीतीश कुमार तत्काल ऐसे मंत्रीयों को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करें.