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खुद की तुलना लालू यादव से करने वाले तेजप्रताप यादव, अपने कार्यकर्ताओं को पिटता छोड़ निकले बाबाधाम

तेजप्रताप यादव अपने कार्यकर्ताओं का ख्याल कैसे रखा जाता है यह तेजप्रताप अपने पिता लालू प्रसाद से नहीं सीख पाए हैं.

खुद की तुलना लालू यादव से करने वाले तेजप्रताप यादव, अपने कार्यकर्ताओं को पिटता छोड़ निकले बाबाधाम
तेजप्रताप यादव बाबाधाम को निकले हैं.

पटनाः लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव तरह-तरह की लीलाएं करते रहते हैं. जो समझ गया वो बच गया जो नहीं समझा वो पिट गया. कुछ ऐसी ही नई तस्वीर सामने आई है. छात्रों के हक की मांग को लेकर तेजप्रताप के कार्यकर्ता शनिवार को पटना पुलिस के हाथों जमकर पिटे. पुलिस ने उन्हें जेल तक भेज दिया. लेकिन तेजप्रताप यादव अपने कार्यकर्ताओं की सुधी लेने की बजाए भगवान शिव के दर्शन करने बाबाधाम निकल गए.

तेजप्रताप यादव अपनी अलग अलग लीलाओं के लिए विख्यात हैं. कभी कृष्ण तो कभी शिव बन जाते हैं. कभी गईया चराते हैं तो कभी बॉडी बनाते हैं. खुद को लालू की छवि में पेश करने की कोशिश भी करते हैं. लेकिन अपने कार्यकर्ताओं का ख्याल कैसे रखा जाता है यह तेजप्रताप अपने पिता लालू प्रसाद से नहीं सीख पाए हैं.

शनिवार को पटना में छात्र आरजेडी के कार्यकर्ताओं ने सीएम हाउस के घेराव का कार्यक्रम तय कर रखा था. विश्वविद्यालय में अनियमितता और छात्रों के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड के खिलाफ तेजप्रताप के कार्यकर्ता सडकों पर उतरे. नियम टूटता देख पटना पुलिस ने तेजप्रताप के कार्यकर्ताओं को जमकर दौड़ा-दौड़ा कर पीटा. कई कार्यकर्ता गिरफ्तार किए गये. उनमें छात्र आरजेडी के अध्यक्ष सृजन स्वराज भी शामिल थे. बाद में गिरफ्तार हुए छात्र आरजेडी के नेताओं को पुलिस ने जेल भी भेज दिया. लेकिन तेजप्रताप पूरी सीन में कहीं नजर नहीं आए.

RJD Leader Tej Pratap yadav went to Deoghar

रविवार को खबर मिली की तेजप्रताप अपनी पूरी टोली के साथ देवघर कूच कर गये हैं. इतना ही नहीं तेजप्रताप ने शिव का रुप धारण किया है. तेजप्रताप ने देवघर जाने के लिए एक पूरी बस बुक की. जिसमें उनके करीबी लोगों के साथ बाउंसर और सेक्यूरिटी गार्ड भी शामिल थे.

हांलाकि इस बात की जानकारी मीडिया को नहीं दी गयी. क्योंकि तेजप्रताप को यह पता था कि एक दिन पहले उनके कार्यकर्ताओं की हुई पिटाई और दूसरे दिन वो भगवान दर्शन करने निकले हैं तो सवाल उठेंगे. इन सवालों से बचने के लिए ही तेजप्रताप चुपचाप देवघर की ओर निकल गये. लेकिन जी मीडिया के हाथ जो वीडियो लगा है उसमें तेजप्रताप यादव काफी निश्चिंत दिख रहे हैं. न तो उन्हें अपने कार्यकर्ताओं के उपर हुए लाठीचार्ज का कोई अफसोस दिख रहा है और न ही इस लाठीचार्ज के विरोध में आगे की रणनीति की चिंता नजर आ रही है. तेजप्रताप खुद को लालू का अंश बताते हैं. लालू के बताये रास्ते पर चलने का दावा भी करते हैं. लेकिन वो ये भूल गये कि अगर लालू होते तो आज अपने मार खाए हुए कार्यकर्ताओं के बीच उनका दुख दर्द बांट रहे होते न कि उन्हें गम में छोड सुकुन की दुनिया में गोते लगा रहे होते.