RJD नेताओं को पढ़ने-लिखने से नहीं कोई मतलब, आंख मूंदकर करते हैं किसी बात पर भरोसा- BJP

आरजेडी के नेताओं को पढ़ने लिखने से कोई मतलब नहीं है. नियम व्यवस्था और कानून से कोई मतलब नहीं है. आंख मूंदकर वह किसी भी बात का विरोध करते हैं. मैं चाहता हूं कि वह स्पष्ट करें जिस तरीके से विरोध कर रहे हैं उस बात का क्या मतलब है?

RJD नेताओं को पढ़ने-लिखने से नहीं कोई मतलब, आंख मूंदकर करते हैं किसी बात पर भरोसा- BJP
RJD नेताओं को पढ़ने-लिखने से नहीं कोई मतलब, आंख मूंदकर करते हैं किसी बात पर भरोसा- BJP.

पटना: बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी (Sushil Modi) ने राज्यसभा में हुए हंगामे को बेहद शर्मनाक बताया है. उन्होंने कहा कि राज्यसभा में जो कुछ भी हुआ वह बेहद शर्मनाक है. उप सभापति की कुर्सी पर कागज फेंके गए. माइक तोड़ने की कोशिश की गई. कई तरह के व्यवहार किए गए जो सर्वथा लोकतंत्र में अनुचित है. बिल की कॉपी को फाड़ा गया.

मार्शल को दीवार बनकर सदस्यों और डिप्टी चेयरमैन के बीच में खड़ा होने की नौबत आ गई. यह दुर्भाग्यपूर्ण है. आरजेडी जैसी पार्टी भी उन्हीं लोगों के साथ खड़ी थी. यह जो अमर्यादित व्यवहार और आचरण किया गया है जिस तरीके का हमला उच्च सदन के कुर्सी पर हुआ है, इससे हर एक बिहारी अपने आप को अपमानित महसूस कर रहा है.

यह हमला हरिवंश जी के साथ नहीं बल्कि हर एक बिहारी के साथ अमर्यादित आचरण हुआ है .

उन्होंने कहा कि पिछले दिनों सुशांत सिंह राजपूत का जो मामला आया था उसमें कांग्रेस ने सीबीआई जांच की मांग की थी. लेकिन उनका दोहरा चरित्र देखिए महाराष्ट्र में उनकी सरकार है. उस यूपीए में आरजेडी का समर्थन है. यहां वह सीबीआई जांच की मांग कर रहे थे जबकि महाराष्ट्र में वह विरोध कर रहे थे.

वही रघुवंश सिंह के साथ आरजेडी के रवैये को लेकर बीजेपी नेता व बिहार सरकार के वित्तमंत्री ने कहा कि रघुवंश प्रसाद सिंह को जिस तरीके से अपमानित किया गया जीवन के अंतिम दिनों में इससे मजबूर होकर उन्होंने पत्र लिखा और पार्टी से त्यागपत्र दिया. लालू परिवार और उनके परिवार के सदस्यों से रघुवंश बाबू इतने आहत थे कि उन्होंने विस्तार से पत्र लिखा. 

लगातार एक पर एक घटना घटी है और विशेष तौर पर कल जो हरिवंश जी जैसे शालीन और पत्रकार रहे व्यक्ति के साथ जिस तरह का आचरण किया गया यह सर्वथा अनुचित है.

उन्होंने कहा कि किसान हित को लेकर जो बिल लाए गए हैं उसमें किसानों को मुक्त कर दिया गया है कि वह जहां चाहे अपने उत्पाद को बेच सकते हैं. किसानों को बाजार समिति के चंगुल में लाने की साजिश विपक्ष कर रहा है. किसान को बिहार में इसमें 1% का टैक्स देना पड़ता था. 

सुशील मोदी ने कहा कि आरजेडी के नेताओं को पढ़ने लिखने से कोई मतलब नहीं है. नियम व्यवस्था और कानून से कोई मतलब नहीं है. आंख मूंदकर वह किसी भी बात का विरोध करते हैं. मैं चाहता हूं कि वह स्पष्ट करें जिस तरीके से विरोध कर रहे हैं उस बात का क्या मतलब है?

केंद्र की सरकार ने स्पष्ट किया है कि बाजार समिति खत्म करना नहीं चाहती है. बाजार समिति के प्रांगण में जो किसान सामान बेचना चाहते हैं वह बेच सकते हैं, लेकिन किसानों को विकल्प है कि वह जहां चाहें वहां अपना सामान भेज सकते हैं. मंडी के बाहर यदि अच्छा मूल्य मिलता है तो वह बेचने के लिए स्वतंत्र हैं. 

किसानों को बताया जा रहा है की न्यूनतम समर्थन मूल्य खत्म कर दिया जाएगा. जबकि ऐसा नहीं है. जानबूझकर भ्रम की स्थिति पैदा की जा रही है.

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को उपज के पहले उसे क्या कीमत मिलेगी वह सुनिश्चित कर दिया जाएगा. जिससे किसानों को लाभ मिलेगा और उसे कोई धोखा नहीं दे पाएगा. किसान उत्पादक संघ मिलकर एक एसपीओ बना लेंगे जो बड़े पैमाने पर मिलकर उत्पाद को बेहतर कीमत पर बेच सकेगा. 

इसके अलावा शहद, सब्जी, फल, मक्का, मखाना ऐसे उत्पादों के लिए पूंजीगत अनुदान देने की योजना बिहार सरकार बनाई है जिससे किसानों को लाभ मिल सके और इससे मिलता-जुलता उद्योग लगाने वाले को अनुदान मिल सके. आज जिस कानून को शिथिल कर रही है, उसी से किसानों को बाजार समिति के चंगुल से मुक्ति मिल जाएगी. 

उन्होंने कहा कि आरजेडी के सदस्य जिस तरह अमर्यादित व्यवहार उच्च सदन में किया है, इसका खामियाजा उन्हें आने वाले दिनों में बिहार विधानसभा के चुनाव में भुगतना पड़ेगा. कांग्रेस और आरजेडी किसान विरोधी है. वह किसान और उद्यमियों का उन्नति नहीं चाहती है. इसलिए परंपरागत तरीके से चीजों का समर्थन करती है और नई और गतिशील बातों का विरोध करती है.