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लोकसभा में करारी हार के बाद RJD विधानसभा चुनाव को लेकर गंभीर, लालू ने संभाली कमान

लोकसभा चुनाव में आरजेडी के करारी हार के बाद अब 2020 में होने वाले विधान सभा चुनाव को लेकर पार्टी काफी गंभीर हो गई है और प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे को बदला जाना तय माना जा रहा है.

लोकसभा में करारी हार के बाद RJD विधानसभा चुनाव को लेकर गंभीर, लालू ने संभाली कमान

पटना: लोकसभा चुनाव में आरजेडी के करारी हार के बाद अब 2020 में होने वाले विधान सभा चुनाव को लेकर पार्टी काफी गंभीर हो गई है और प्रदेश अध्यक्ष रामचंद्र पूर्वे को बदला जाना तय माना जा रहा है. नए अध्यक्ष की तलाश भी तेज हो गई है. पार्टी का संगठन चुनाव भी शुरू हो रहे हैं और नवंबर में प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव होना है. प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी इस बार लालू प्रसाद किसी सीनियर नेता को देना चाहते हैं. वहीं बिहार सरकार में जेडयू कोटे से मंत्री नीरज कुमार ने साफ कह दिया है की पहले लालू यादव जेल मेनुअल को पढ़े फिर कुछ करने को सोचे क्योंकि जेल से अपने परिवार के लिये पत्र लिखा जा सकता है न की पार्टी को चलाया जा सकता है.

मेरी सलाह है की कम से कम धारा 999 को ठीक से लालू यादव पड़े और 999 को बार बार RJD को याद करना चाहिए. वहीं बीजेपी के विधायक संजीव चौरसिया का कहना है की आरजेडी भी देश चुनाव की परंपरा कौन समाज के सामने प्रदर्शित करना चाहते हैं. आरजेडी को पता है कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जो हैं वही रहेंगे.

प्रदेश अध्यक्ष के पद पर जितनी सरगर्मी बनाने का प्रयास कर रही है RJD लेकिन उनके सदन के नेता का चेहरा समाज में नहीं दिखाई दे रहा है. तेजस्वी सदन से लेकर जनता तक दिखाई नहीं दे रहे है आरजेडी चुनाव के ढोंग का परंपरा रच रही है.

आरजेडी के प्रवक्ता भाई वीरेंद्र सत्ता पक्ष के इस सवाल पर यह कह रहे हैं कि मेरे अंगने में तुम्हारा क्या काम है यह आरजेडी का घर है और सत्ताधारी पार्टी गीत गा रही है वह हमें नही देखे बल्कि अपने को देखे पार्टी मजबूती से आगे बढ़ेगी RJD का पहला पसंद अल्पसंख्य है. कांग्रेस की माने तो यह RJD का आंतरिक मामला है और पार्टी में फेर बदल कर रहे है तो यह उनका मामला है.

इसमें किसी दूसरे को नहीं बोलना चाहिए कांग्रेस की शुभकामनाएं हैं. RJD इस बार सभी वरीय नेताओं को विश्वास में ले रही है सिर्फ तेजस्वी की राय को प्रमुखता नहीं देगी. लालू प्रसाद इस चिंता में हैं कि आने वाले दिनों में बिहार में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं इसलिए पार्टी के सभी नेताओं की राय से ही किसी नेता को अध्यक्ष की कुर्सी दी जाए ताकि किसी को काम करने में कोई परेशानी न हो.