लालू यादव के फार्मूले पर फिर चलेगी RJD, माय समीकरण-अतिपिछड़ों के जरिए तलाशेगी जमीन
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लालू यादव के फार्मूले पर फिर चलेगी RJD, माय समीकरण-अतिपिछड़ों के जरिए तलाशेगी जमीन

 लालू यादव कहते थे कि उनके साथ माय है यानि कि मुस्लिम और यादव साथ है. लेकिन  2019 के लोकसभा चुनाव में जीरो पर आउट हुई आरजेडी की नजर 2020 के विधानसभा चुनाव पर है. 

तेजस्वी यादव का कहना है कि पार्टी में 60 फीसदी अतिपिछड़ों को जगह मिलेगी.

पटना: एक समय था जब सिर्फ बिहार नहीं देश की राजनीति में लालू यादव का सितारा चमक रहा था. लालू यादव कहते थे कि उनके साथ 'माय' है यानि कि मुस्लिम और यादव साथ है. लेकिन  2019 के लोकसभा चुनाव में जीरो पर आउट हुई आरजेडी की नजर 2020 के विधानसभा चुनाव पर है. आरजेडी अब अतिपिछड़ा की राजनीति करने में जुट गई है. पार्टी के नेता तेजस्वी यादव का कहना है कि पार्टी में 60 फीसदी अतिपिछड़ों को जगह मिलेगी.

वहीं, आरजेडी के विधायक रामानुज प्रसाद अपने नेता के बयान से और बढ़ कर बोल दिया. उनकी माने तो अतिपिछड़ों को 60 फीसदी से अधिक भागीदारी दी जाए. रामानुज की मानें तो लालू यादव के समय बैलेट बॉक्स से जिन्न निकलता था जो की मंदिर-मस्जिद की चकर में विपक्षियों के पास चला गया है लेकिन वो फिर से आरजेडी के पास आ रहा है. 

 

जेडयू का कहना है कि लोकसभा चुनाव में जनता ने साफ कर दिया है कि 'माय' समीकरण अब नहीं बची है. आरजेडी की पहचान जातीय गोलबंदी रही है लेकिन इन जातियों में जो मतदाता है वह बदल रहा है क्योंकि सबको 1990 के मुकाबले 2005 का बिहार लगता है कि बदल रहा है. पार्टी के प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा की अब ये आरजेडी का नया पैतरा है और कोई भी चुनाव हो आरजेडी ने अतिपिछड़ों को छलने का काम किया है इसलिए उनको कोई भी लाभ नहीं मिलने वाला है. जिन्न एनडीय के बोतल में बंद है अब आरजेडी के चाहने पर भी बाहर निकलने वाला नहीं है. 

आरजेडी के पिछडों की राजनीति पर बीजेपी ने भी निशाना साधा है. पार्टी के विधान पार्षद नवल यादव ने कहा है कि लोकसभा चुनाव में साफ हो गया है कि यादव और अतिपिछड़ा एनडीए के साथ है अब मुस्लिम भी हमारे साथ है. आरजेडी पूरी तरह से फेल है आने वाले दिनों में आरजेडी के कई विधायक हमारे साथ होंगे क्योंकि वो सम्पर्क में हैं. 

एक तरफ आरजेडी 1990 से 2000 के जिन्न को निकालने की फिराक में है. क्योंकि 15 साल सत्ता से बाहर रहने पर अब उसे अतिपिछड़ा याद आया है. अब देखना यह है कि 2020 में अतिपिछड़ा सत्ता तक आरजेडी को पहुंचा पाते है या नहीं.