धनबाद में सड़क दुर्घटनाएं बनीं काल, 1 साल में 167 लोगों की मौत, 224 लोग जख्मी

वही, आम लोग भी लोगों को ट्रैफिक रूल्स पालन करने की सलाह दे रहे हैं. वही लोगों का कहना है कम उम्र में वाहन चलाने के कारण सही से जानकारी चालकों को नहीं होने के कारण ज्यादातर दुर्घटनाएं होती हैं.

धनबाद में सड़क दुर्घटनाएं बनीं काल, 1 साल में 167 लोगों की मौत, 224 लोग जख्मी
धनबाद में सड़क दुर्घटनाएं बनीं काल, 1 साल में 167 लोगों की मौत, 224 लोग जख्मी.

नीतेश मिश्रा/धनबाद: वाहन चालकों की लापरवाही के कारण ही अब शहर की सड़कों पर काल मंडराने लगा है. सड़कों पर कुछ व्यवस्था कर खामियां भी काल को न्योता दे रही है. हर दिन कहीं ना कहीं सड़क दुर्घटनाएं हो रही है. बावजूद लोग नहीं चेत रहे हैं. कई पहलुओं पर पुलिस प्रशासन की लापरवाही स्पष्ट दिखाई दे रही है. 

शहर के कई प्रमुख सड़कों पर ट्रैफिक निर्देशों का पालन नहीं हो पा रहा है और ना सड़कों पर सुरक्षा को लेकर कोई ठोस उपाय किए गए हैं. यही वजह है कि वर्ष 2020 में कोरोना महामारी की जंग में लोक डाउन के बावजूद 167 लोगों की मौत सड़क दुर्घटना में हो गई है.

हर रोज चौक-चौराहे पर सुबह से ट्रैफिक पुलिस तैनात रहती है. चेकिंग भी होती है. लोगों से फाइन भी काटा जाता है, पर शाम होते ही सड़क पर काल मंडराने लगता है, या यूं कहें कि धनबाद की सड़क खून पीने के लिए शाम का इंतेजार करती है. यह हम नहीं कहते ये आंकड़े कह रहे हैं. जिले में अब एक वर्ष में 167 लोगों की मौत हुई जबकि 224 लोग जख्मी हुए. 

सिर्फ 2020 के दिसंबर महीने में है. सड़क दुर्घटना में 32 लोगों की जान चली गई. वहीं 8 लोग जख्मी हुए. दिसंबर के 31 दिनों में 41 दुर्घटनाएं हुई. वही धनबाद आज से सड़क सुरक्षा सप्ताह की शुरुआत हो गई है. पुलिस लोगों को जागरूक करने के लिए गुलाब का फूल दे रही है और नकद नाटक के जरिए ट्रैफिक नियम का पालन करने को लेकर जागरूक किया जा रहा है.

मौत का आंकड़ा पिछले 3 वर्षों की तुलना में कम तो है पर यह आंकड़ा इस बात को इंगित करता है कि कोविड-19 के कार्यकाल में जब पूरा देश लॉकडाउन था. गाड़ियां कम चल रही थी और अनलॉकडाउन के बाद जैसे ही सड़क पर छक्के दौड़ने लगे मनो सड़क मौत मांगने लगी. जिले के अधिकारियों की मानें तो जितने भी सड़क दुर्घटना में मौत हुई है करीब करीब नशे के हालत में गाड़ी चलाने के कारण ही हुई है.

दूसरी ओर चार पहिया वाहन के चालक ट्रैफिक रूल का पालन करते नहीं देखे जाते हैं ना तो सीट बेल्ट का यूज़ करते हैं ना ही स्पीड कंट्रोल रहता है. सड़क के बीच डिवाइडर भी सड़क दुर्घटना का मुख्य वजह बन रही है. लोग जल्दबाजी में रहते हैं और रॉन्ग साइड से चलते हैं, जिसके कारण आये दिन दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं. 

शहर के अधिकांश सड़क अतिक्रमणकारियों के चंगुल में हैं. कई जगहों पर अतिक्रमण के कारण सड़कें संकरी हो गई हैं. कई जगह तो पार्किंग स्थल बनाकर ठेकेदारों को पार्किंग शुल्क वसूलने के लिए दे दिया गया है. जिले के कई सड़कों पर जहां-तहां गड्ढे हैं उस पर न तो सड़क विभाग का ध्यान जाता है और ना ही प्रशासन का. शहर की कई सड़कों पर रिफ्लेक्टर तक नहीं लगाएगा.

वाहनों की गति सीमा का कोई वर्ड नहीं लगा है. बरवाअड्डा, गोविंदपुर रोड समेत कई जगहों पर तो सड़क किनारे ही बड़े वाहन भी खड़े कर दिए जा रहें हैं. ऐसी स्थिति में दुर्घटना का ग्राफ बढ़ना स्वाभाविक है. जिस सड़क को वाहन चलने के लिए बनाया गया है उस सड़क किनारे दुकान सजा दिए गए. ऐसी स्थिति में जरा भी वाहनों का संतुलन बिगड़ता है तो वाहन चालकों को वाहन संभालना मुश्किल हो जाता है और चालक दुर्घटना के शिकार होते हैं.

वही, आम लोग भी लोगों को ट्रैफिक रूल्स पालन करने की सलाह दे रहे हैं. वही लोगों का कहना है कम उम्र में वाहन चलाने के कारण सही से जानकारी चालकों को नहीं होने के कारण ज्यादातर दुर्घटनाएं होती हैं.

बहरहाल, जिले में हो रही लगातार सड़क दुर्घटनाओं और उन हादसे में बढ़ते मृत्यु दर ने जिला प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है. इसके बाद सड़क हादसे और मृत्यु दर में कमी लाने के लिए परिवहन विभाग ने जागरूकता अभियान चलाने का फैसला किया है. अब देखना यह है कि क्या इस अभियान से दुर्घटना में कितना अंकुश लग पाएगा.