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रोहतास जिले के बिक्रमगंज अनुमंडल कार्यालय में मंगलवार को बड़ी कार्रवाई हुई थी. निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने यहां कार्यरत चपरासी विनोद कुमार को 1 लाख 60 हजार रुपये रिश्वत लेने के आरोप में रंगे हाथ गिरफ्तार किया था. घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई थी और इसे लेकर चर्चा तेज हो गई थी.
लेकिन इस पूरे मामले ने बुधवार को नया मोड़ ले लिया. निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने विनोद कुमार से करीब 9 घंटे तक लगातार पूछताछ की और जांच के बाद उसे निर्दोष मानते हुए छोड़ दिया. इसके बाद जिला पुलिस के माध्यम से प्रेस रिलीज जारी कर आधिकारिक तौर पर बताया गया कि विनोद कुमार को फंसाने की साजिश रची गई थी.
जांच के दौरान अनुमंडल कार्यालय का सीसीटीवी फुटेज सामने आया. इसमें साफ दिखा कि दो लोग पैसे से भरा बैग लेकर आए और चुपके से कर्मचारियों के पीछे रखकर वहां से निकल गए. इसी बीच निगरानी की टीम पहुंची और बैग मिलने पर चपरासी को पकड़कर ले गई. यह पूरा घटनाक्रम कैमरे में रिकॉर्ड हो गया, जिससे सच्चाई सामने आ गई.
पूछताछ के बाद विनोद कुमार ने बताया कि उसका अपने गोतीया पटीदार राकेश कुमार से जमीन को लेकर विवाद चल रहा है. इसी विवाद के कारण राकेश कुमार और उसके साथी दीपक ने मिलकर उसे झूठे मामले में फंसाने की कोशिश की. लेकिन सीसीटीवी फुटेज के सामने आने के बाद उनकी साजिश नाकाम हो गई.
यह मामला सामने आने के बाद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं. लोग कह रहे हैं कि बिना ठोस सबूत और सही जांच के किसी को पकड़ना और बाद में छोड़ देना, एजेंसी की साख पर सवाल खड़े करता है. अब निगरानी की टीम पर भी जांच का दबाव बढ़ गया है.
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