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समस्तीपुर उपचुनाव : LJP के गढ़ में किसका होगा कब्जा, सभी कर रहे अपने जीत के दावे

इस चुनाव में मुख्य मुकाबला एनडीए प्रत्याशी प्रिंस राज और महागठबंधन का प्रत्याशी डॉ अशोक कुमार के बीच है. लेकिन निर्दलीय उम्मीदवार भी अपनी जीत को लेकर कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं.

 समस्तीपुर उपचुनाव : LJP के गढ़ में किसका होगा कब्जा, सभी कर रहे अपने जीत के दावे
पिता की सीट पर किस्मत आजमा रहे प्रिंस राज (तस्वीर साभार- @princerajpaswan)

समस्तीपुर: बिहार में 5 विधानसभा और एक लोकसभा सीट के लिए उप चुनाव हो रहे हैं.  21 अक्टूबर को होने वाले मतदान के चुनाव प्रचार का आज यानी शनिवार को आखिरी दिन है.

इस चुनाव में अपनी अपनी जीत को सुनिश्चित करने के लिए तमाम प्रत्याशी जी जान से जुटे हुए हैं. समस्तीपुर सुरक्षित लोकसभा सीट के लिए हो रहे हैं इस उपचुनाव में कुल 8 प्रत्याशी चुनाव मैदान में अपना भाग्य आजमा रहे हैं.

एनडीए (NDA) से एलजेपी (LJP) प्रत्याशी प्रिंस राज चुनाव लड़ रहे हैं. वहीं, महागठबंधन  (Mahagathbandhan)से कांग्रेस (Congress) उम्मीदवार डॉ अशोक कुमार चुनाव में खड़े हैं. 

वैसे तो, इस चुनाव में मुख्य मुकाबला एनडीए प्रत्याशी प्रिंस राज और महागठबंधन का प्रत्याशी डॉ अशोक कुमार के बीच है. लेकिन निर्दलीय उम्मीदवार भी अपनी जीत को लेकर कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं.

एक तरफ जहां आरजेडी (RJD) के पूर्व राज्यसभा सांसद ब्रह्मदेव आनंद पासवान की पुत्री अनामिका पासवान तो, वहीं दूसरी बार इस लोकसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे सूरज दास भी अपने जीत को लेकर आश्वस्त नजर आ रहे हैं.

निर्दलीय उम्मीदवार के रूप पर चुनाव लड़ रही अनामिका पासवान अपनी महिला बैंड पार्टी की एक टोली के साथ चौक चौराहों पर गीत संगीत के माध्यम से लोगों को रिझाने में लगी है. वहीं, सूरज दास रोड शो के माध्यम से लोगों से अपने पक्ष में वोट करने की अपील कर रहे हैं. 

अनामिका का कहना है कि इस क्षेत्र का अब तक प्रतिनिधित्व कर चुके सांसदों ने विकास का कोई काम नहीं किया है. समस्तीपुर में लोकतंत्र कहीं नजर नहीं आ रहा है. यहां परिवारवाद और वंशवाद हावी है, जिस कारण लोग अब तक खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं. 

वहीं, सूरज दास अपने जीत को लेकर आश्वस्त हैं. उनका कहना है कि इस बार के चुनाव में कोई लहर नहीं चल रही है. इस बार सिर्फ और सिर्फ टेंपू छाप की लहर है. समस्तीपुर के युवा इस बार सबक सिखाने के मूड में हैं. साथ ही मतदाता पूरे गुस्से में हैं. परिवारवाद और वंशवाद का आश्रय हो चला है. यहां तक की सभी दल के कार्यकर्ता भी सबक सिखाने के मूड में है.

उन्होंने कहा कि उन्हें अंदरूनी समर्थन सबका प्राप्त है. इस बार लोकतंत्र का एक नमूना पेश करना है.