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बांग्लादेश की जेल से 12 सालों बाद रिहा हुआ बिहार का सतीश, पटना से हुआ था लापता

दर्शना गेडे बॉर्डर पर बॉर्डर गार्ड्स बांग्लादेश (बीजीबी) ने सतीश चौधरी को बीएसफ को सौंप दिया है. बॉर्डर पर इस दौरान सतीश के छोटे भाई मुकेश चौधरी भी मौजूद थे. 

बांग्लादेश की जेल से 12 सालों बाद रिहा हुआ बिहार का सतीश, पटना से हुआ था लापता
बॉर्डर पर इस दौरान सतीश के छोटे भाई मुकेश चौधरी भी मौजूद थे.

मुकेश, दरभंगा: बिहार के दरभंगा के हायाघाट प्रखण्ड के मनोरथा निवासी सतीश चौधरी को 11 साल बाद बांग्लादेश की जेल से रिहा कर दिया गया है. दर्शना गेडे बॉर्डर पर बॉर्डर गार्ड्स बांग्लादेश (बीजीबी) ने सतीश चौधरी को बीएसफ को सौंप दिया है. बॉर्डर पर इस दौरान सतीश के छोटे भाई मुकेश चौधरी भी मौजूद थे. 

रिहाई की खबर फोन पर सुनते सतीश के परिवार के साथ पूरे गांव मे खुशी की लहर दौड़ गई. गांव के लोग सतीश के स्वागत की तैयारी में लग गए हैं. आपको बता दें कि 2008 में मानसिक तौर पर बीमार सतीश चौधरी इलाज के लिए पटना आए थे और फिर अचानक गायब हो गए. बाद में 2012 में जानकारी मिली की वह बांग्लादेश के जेल में बंद हैं.

 

अपने भाई को छुड़ाने के लिये सतीश का छोटे भाई मुकेश चौधरी सालों से कोशिश कर रहा था. 2012 में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी मुलाकात की. थक हारकर मुकेश चौधरी ने इसी साल जुलाई माह में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया से सम्मानित मानवाधिकार कार्यकर्ता विशाल रंजन दफ्तुआर को पत्र लिखा. 

दफ्तुआर ने इस पर तुरंत संज्ञान लेते हुए बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना, सुप्रीम कोर्ट आफ इंडिया के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, विदेश मंत्री डा. एस जयशंकर और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखा जिसके बाद तुरंत कारवाई की गई और सतीश वापस अपने घर पहुंच गया.