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मधुबनी: विद्यालय के भवन की जर्जर हालत, खतरे में है 1100 छात्राओं का जीवन

1980 में स्थापित विद्यालय का पुराना भवन जर्जर है. जिस कमरे में बैठकर छात्राएं पढ़ाई करती है, उसकी छत का प्लास्टर टूटकर नीचे गिर रहा है.  लिहाजा बच्चे सहमकर पढ़ने को मजबूर हैं और कुछ बच्चे तो डर के मारे वापस लौट जाते हैं.

 मधुबनी: विद्यालय के भवन की जर्जर हालत, खतरे में है 1100 छात्राओं का जीवन
कुछ बच्चे तो डर के मारे वापस लौट जाते हैं.

मधुबनी: सरकार कितनी भी शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के दावे करती हो लेकिन आई दिन सच्चाई सामने आ जाती है. जर्जर कन्या स्कूल में 1100 लड़कियों की जान खतरे में है. फुलपरास अनुमंडल के घोघरडीहा प्रखंड में एक मात्र प्लस टू अन्नपूर्णा बाबू झा प्रोजेक्ट कन्या उच्च विद्यालय है. जिसमें 1100 छात्राएं नामांकित है. इन 11 सौ छात्राओं के पढ़ने के लिए विद्यालय में एक भी कमरा नहीं है. 

1980 में स्थापित विद्यालय का पुराना भवन जर्जर है. जिस कमरे में बैठकर छात्राएं पढ़ाई करती है, उसकी छत का प्लास्टर टूटकर नीचे गिर रहा है.  लिहाजा बच्चे सहमकर पढ़ने को मजबूर हैं और कुछ बच्चे तो डर के मारे वापस लौट जाते हैं.

साल 2014-15 में भवन निर्माण विभाग ने  प्लस टू का नया भवन निर्माण कार्य शुरू कराया था. लेकिन ठेकेदार उसे अधूरा छोड़कर ही फरार हो गया. जिससे अब तक बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है. कुल मिलाकर बच्चों की पढ़ाई होना मुश्किल हो गया है.  पुराने जर्जर भवन में छात्राएं पढ़ने के लिए विद्यालय आती जरूर हैं, लेकिन छत से टूटकर गिरते प्लास्टर को देखकर भी कुछ नहीं कर पा रही हैं.

इधर, शिक्षक भी अपनी ड्यूटी करने के लिए जान जोखिम में डालकर विद्यालय में पढ़ाने आते हैं. विद्यालय के भवनों की जो स्थिति है, कमोबेश विद्यालय परिसर का भी वही हाल है. परिसर में बारिश के समय कई फ़ीट पानी भर जाता है. इतना ही नहीं, विद्यालय परिसर में लंबे समय से जल जमाव के कारण बीमारी फैलने का डर बना रहता है. विद्यालय में छात्राओं की साइकिल खड़ी करने की भी जगह नहीं है.

 ऐसा नहीं कि विद्यालय की इस दशा से विभाग को अवगत नही कराया गया. प्रभारी प्रधानाध्यपक ललित प्रसाद सिंह ने बताया कि जिला पदाधिकारी, जिला शिक्षा पदाधिकारी समेत स्थानीय अधिकारी और जनप्रतिनिधियों तक को पत्र लिखकर विद्यालय की स्थिति से कई बार अवगत कराया गया, लेकिन समस्या जस की तस बनी रही. अब हालात ये हैं कि जर्जर भवन की छत से पानी टपकने से महत्वपूर्ण कागजात भी खराब हो चुके हैं. शिक्षक और कर्मचारिों की जान  खतरे से खाली नहीं है. कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है. ऐसे में सभी को मदद की आस है.
Jyoti, News Desk