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बिहारः छह माह में पटना यूनिवर्सिटी में दूसरी बार दीक्षांत समारोह का हुआ आयोजन

पटना यूनिवर्सिटी ने छह महीने के अंदर ही दूसरी बार दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया है. दीक्षांत समारोह में 872 छात्रों को डिग्री दी गई. 

बिहारः छह माह में पटना यूनिवर्सिटी में दूसरी बार दीक्षांत समारोह का हुआ आयोजन
पटना विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया.

पटनाः पटना यूनिवर्सिटी ने छह महीने के अंदर ही दूसरी बार दीक्षांत समारोह का आयोजन किया गया है. दीक्षांत समारोह में 872 छात्रों को डिग्री दी गई. एशिया की सातवीं पुरानी यूनिवर्सिटी में शामिल पटना यूनिवर्सिटी की कमी को एक बार फिर उजागर किया गया. 

राज्य के शिक्षा मंत्री, कुलपति और राज्यपाल लालजी टंडन के सामने ही मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए प्रोफेसर ब्रज बिहारी कुमार ने कहा कि, यूनिवर्सिटी का स्तर गिरा है और शिक्षकों की कमी एक बड़ी समस्या है.

पटना यूनिवर्सिटी ने साल 2018 में पास (स्नातक और सर्टिफिकेट कोर्स को छोड़कर) 1608 छात्र और छात्राओं में 872 छात्रों को डिग्री दी गई. कुल 42 स्वर्ण पदकों में 31 पर छात्राओं का कब्जा रहा. मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल आईसीएसएसआर यानि इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिर्सच के अध्यक्ष प्रोफेसर ब्रज बिहारी कुमार ने अपने संबोधन में पटना यूनिवर्सिटी की खामियां गिना दी. 

ब्रज बिहारी कुमार ने कहा कि, कभी इस यूनिवर्सिटी का शानदार इतिहास हुआ करता था आज भी इसकी खूबियां हैं लेकिन इसकी एक बड़ी कमी है और जब तक इसे दुरूस्त नहीं किया जाएगा. पटना यूनिवर्सिटी का स्तर नीचे गिरता जाएगा. प्रोफेसर ब्रज बिहारी कुमार ने कहा कि, कहीं न कहीं यूनिवर्सिटी से गलती हुई है और यूनिवर्सिटी का स्तर गिरा है. कहीं एक शिक्षक हैं तो कहीं एक भी नहीं. और इसमें सुधार किए जाने की जरूरत है. विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर रासबिहारी प्रसाद सिंह ने भी माना कि यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर की कमी है जिसमें सुधार किया जा रहा है.

दीक्षांत समारोह के राज्य के राज्यपाल लालजी टंडन और शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन वर्मा ने भी संबोधित किया. राज्यपाल लालजी टंडन ने कहा कि, बिहार में पिछले कुछ दशकों से दीक्षांत समारोह का आयोजन ही खत्म हो गया था. लेकिन एक  यूनिवर्सिटी को छोड़कर बाकी सभी यूनिवर्सिटी में दीक्षांत समारोह हो रहा है.

लालजी टंडन ने कहा कि, देश में कई सालों के बाद ऐसी सरकार बनी है जिसने शिक्षा के मामले में काफी काम किया है. वहीं शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन वर्मा ने शिक्षा के लिए हर संभव  मदद दी जाएगी.हालांकि यूनिवर्सिटी से उपाधि पाने वाले छात्र और छात्रा इस बात से खुश थे कि यहां कम से कम सत्र और परीक्षाएं तो समय पर हो रहे हैं.

सिर्फ कोई यूनिवर्सिटी डिग्री देकर अपने कर्तव्यों को पूरा नहीं समझ सकती है. जरूरत है कि यहां रिक्त पदों पर नियुक्ति हो ताकि शिक्षा का भविष्य बेहतर हो सके.