बिहार: RJD नेताओं के बयान से सामने आई पार्टी की कलह, JDU ने किया नो एंट्री का ऐलान

आरजेडी नेताओं को भले ही अब्दुलबारी सिद्दीकी का बयान नहीं पसंद आ रहा है, लेकिन जेडीयू के नेता इससे गदगद हैं और सवाल भी कर रहे हैं.

बिहार: RJD नेताओं के बयान से सामने आई पार्टी की कलह, JDU ने किया नो एंट्री का ऐलान
आरजेडी नेताओं के बयान पर सियासी बवाल... (फाइल फोटो)

पटना : राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के वरिष्ठ नेता अब्दुलबारी सिद्दीकी (Abdul Bari Siddiqui) के बयान ने आरजेडी के अंदर चल रहे घमसान को उजागर किया है, लेकिन अब पार्टी के नेताओं को इस पर जवाब नहीं सूझ रहा है. वहीं, जनता दल युनाइटेड (जेडीयू) नेता इसे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की लोकप्रियता से जोड़कर देख रहे हैं. इसके साथ ही आरजेडी के लिए नो एंट्री का ऐलान भी कर रहे हैं. लगे हाथ कांग्रेस इसे आरजेडी का अंदरूनी मामला बताकर पूरे मामले से पल्ला झाड़ रही है.

जेडीयू को लेकर आरजेडी के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह (Raghuvansh Prasad Singh) की तरफ से दिए गए बयान ने बिहार की राजनीति में नए कयासों को जन्म दिया ही थी कि तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav) के बयान ने उस पर विराम लगा दिया. लेकिन अब रघुवंश प्रसाद सिंह के समर्थन में आरजेडी के कद्दावर नेता अब्दुलबारी सिद्दीकी भी उतर आए. इसके बाद पार्टी के अंदर चल रही आंतरिक कलह पूरी तरह सामने आ गई. इसका जवाब पार्टी नेताओं को नहीं सूझ रहा है.

आरजेडी नेता सुबोध राय का कहना है कि हर व्यक्ति की अपनी सोच होती है. अब्दुलबारी सिद्दीकी ने जो बयान दिया है, उसमें ज्यादा टीका टिप्पणी करने का मतलब नहीं है. वहीं आरजेडी के एक अन्य नेता विजय प्रकाश का कहना है कि अब्दुलबारी सिद्दीकी के बयान में जो इशारा किया गया है, उसे नहीं समझा. उन्होंने कहा कि वह नीतीश कुमार की ओर इशारा कर रहे थे, जिसमें उनका मतलब था कि नीतीश कुमार को अपना ईगो त्याग करके तेजस्वी यादव के सामने सरेंडर करना चाहिये.

आरजेडी नेताओं को भले ही अब्दुलबारी सिद्दीकी का बयान नहीं पसंद आ रहा है, लेकिन जेडीयू के नेता इससे गदगद हैं और सवाल भी कर रहे हैं. वहीं, बीजेपी नीति और नीयत का सवाल खड़ा कर रही है.

जेडीयू प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को चाहनेवाले हर दल में हैं, लेकिन रघुवंश प्रसाद सिंह और अब्दुलबारी सिद्दीकी के बयानों का ये मतलब नहीं है कि हम कुछ करने जा रहे हैं. 2019 में जो सफलता मिली है, उससे भी बड़ी सफलता 2020 में मिलेगी. अगर कोई भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है, तो हम इसका विरोध करते हैं.

वहीं, बीजेपी नेता अरुण सिन्हा ने कहा कि आरजेडी नेताओं की बात और कर्म में बहुत अंतर है. हमारी केंद्र और राज्य में सरकार है. हम बेहतरी की तरफ बढ़ रहे हैं. जनता का समर्थन हमारे साथ है और आनेवाले चुनाव में भी रहेगा.

आरजेडी की सहयोगी कांग्रेस भी इस मुद्दे पर पल्ला झाड़ रही है. कांग्रेस एमएलसी प्रेमचंद मिश्रा ने इसको आरजेडी का अंदरूनी मामला बताया है. उन्होंने कहा कि पार्टी का नेतृत्व इसको हल कर लेगा. उन्होंने कहा कि आरजेडी में रघुवंश प्रसाद सिंह और अब्दुलबारी सिद्दीकी जैसे बड़े नेता क्या बोल रहे हैं, ये पूरी तरह से आरजेडी का अंदरूनी मामला है. हमें विश्वास है कि आरजेडी का नेतृत्व इसे हल करने में सफल रहेगा, हम इसकी कामना करते हैं. हमारे सामने अपने दल को मजबूत करने की चुनौती है, जिसे हम करने जा रहे हैं.

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लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से आरजेडी की आंतरिक कलह लगातार सामने आ रही है. पार्टी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के परिवार में वर्चस्व को लेकर जिस तरह की लड़ाई चल रही है, उसको लेकर लगातार चर्चा हो रही है. अब जिस तरह से रघुवंश प्रसाद सिंह और अब्दुलबारी सिद्दीकी जैसे नेताओं ने मोर्चा खोल दिया है, उससे साफ लग रहा है कि पार्टी को एकजुट रखने की राह आसान नहीं होगी.