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Barbigha Vidhansabha Seat: बरबीघा विधानसभा क्षेत्र में सबसे बड़ा मुद्दा अनुमंडल बनाने का है. यह मांग लंबे समय से जनता उठा रही है, लेकिन अब तक पूरी नहीं हो सकी. इसके साथ ही बरबीघा को रेल मार्ग से जोड़ने की मांग भी पिछले 25 सालों से लंबित है. यहां के लोग मानते हैं कि रेल संपर्क मिलने से व्यापार और रोजगार के नए अवसर खुलेंगे.
बरबीघा क्षेत्र के लोग लगातार मेहूस को प्रखंड बनाने की मांग करते रहे हैं. उनका कहना है कि इससे प्रशासनिक सुविधाएं आसान होंगी और आम लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ जल्दी मिलेगा.
बरबीघा में किसानों की सबसे बड़ी परेशानी सिंचाई की है. नहरों की उड़ाही और पानी की व्यवस्था की मांग हमेशा से उठती रही है. वहीं शहर क्षेत्र की मुख्य समस्या जाम की है. लोग चाहते हैं कि ट्रैफिक प्रबंधन और सड़क चौड़ीकरण से इस परेशानी का हल निकले.
पिछले विधानसभा चुनाव में बरबीघा सीट पर बेहद करीबी मुकाबला हुआ था. जदयू के सुदर्शन कुमार ने कांग्रेस के गजानंद शाही उर्फ मुन्ना शाही को केवल 113 मतों से हराकर जीत हासिल की थी. इस जीत ने साबित किया कि यहां का राजनीतिक माहौल बेहद टक्कर वाला है.
आगामी चुनाव में जदयू, भाजपा, कांग्रेस और अन्य दलों के उम्मीदवार प्रमुख दावेदार होंगे. जातीय समीकरण की बात करें तो बरबीघा क्षेत्र भूमिहार बहुल है, जबकि कुर्मी, महतो, यादव और अन्य वर्ग भी यहां निर्णायक भूमिका निभाते हैं.
बरबीघा की पहचान बिहार के पहले मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह के क्षेत्र के रूप में है. इस वजह से यहां की जनता हमेशा से विकास और शिक्षा पर खास ध्यान देने की उम्मीद रखती है.
बरबीघा की जनता की मुख्य मांग शिक्षा और रोजगार के अवसर बढ़ाने की है. इसके अलावा खेती के लिए सिंचाई को लेकर मिर्जाईन पैन और पौरा से मौर तक श्री बाबू के जमाने वाली नहर की उड़ाही की मांग भी लंबे समय से उठाई जा रही है.
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