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बिहार: आरा की दो बहनों ने पेश की मिसाल, पिता की चिता दी मुखाग्नि

डॉ केबी सहाय की दो बेटियां हैं जो आरा से बाहर अपने परिवार के साथ रहती हैं. पिता की मौत के बाद दोनों बेटियां आरा के मानसरोवर कॉलोनी स्थित उनके आवास पर पहुंची और भाई नहीं होने के कारण फर्ज अदा किया.

बिहार: आरा की दो बहनों ने पेश की मिसाल, पिता की चिता दी मुखाग्नि
बेटियों ने दिया पिता की अर्थी को कंधा.

आरा: हिंदू धर्म में बेटे या पुरुष के द्वारा चिता को कंधा और मुखाग्नि देने की परंपरा है. लेकिन आरा की दो बहनों नें पिता की अर्थी को कंधा और चिता को मुखाग्नि देकर एक नई मिसाल पेश की है. पूरे इलाके में दोनों बेटियों के इस पहल की चर्चा हो रही है. लोग इसकी सराहना कर रहे हैं. 

भोजपुर जिला के आरा के मानसरोवर कॉलोनी में आरा के प्रसिद्ध चर्म रोग विशेषज्ञ डॉक्टर केबी सहाय की मौत हृदय गति रुक जाने के कारण हो गई. उनकी मौत के बाद उनकी दोनों बेटियां कजरी वर्मा और कविता देवकुलीयार ने बेटे का फर्ज अदा किया. दोनों बेटियों ने पिता की अर्थी को कंधा तो दिया ही, साथ ही श्मशान घाट जाकर चिता को मुखाग्नि भी दी. इस पूरे घटना को देख लोगों का दिल पसीज गया.

डॉ केबी सहाय की दो बेटियां हैं जो आरा से बाहर अपने परिवार के साथ रहती हैं. पिता की मौत के बाद दोनों बेटियां आरा के मानसरोवर कॉलोनी स्थित उनके आवास पर पहुंची और भाई नहीं होने के कारण फर्ज अदा किया.

हिंदू धर्म के अुनसार घर में किसी के मौत होने पर बेटा ही मुखाग्नि देता है. बेटा नहीं रहने की स्थिति में घर का कोई पुरुष ही पूरे श्राद्धकर्म को अंजाम देता है. लेकिन आरा की इन दो बहनों ने नया मिसाल पेश किया है.