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नए शव वाहन बढ़ा रहे हैं RIMs की शोभा, लोगों को नहीं मिल रही है सुविधा

राजधानी रांची स्थित सूबे के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स में नए शव वाहनों की सुविधा लोगों को नहीं दी जा रही है. यहां पैसे खर्च करके निजी एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ता है.

नए शव वाहन बढ़ा रहे हैं RIMs की शोभा, लोगों को नहीं मिल रही है सुविधा
रिम्स अस्पताल में शव वाहन सुविधा नहीं दी जा रही है.

सौरभ शुक्ला/रांचीः राजधानी रांची स्थित सूबे के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स में नए शव वाहनों की सुविधा लोगों को नहीं दी जा रही है. सरकारी सुविधा होने के बावजूद लोगों को यहां पैसे खर्च करके निजी एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ता है. वहीं, नए शव वाहन होने के बाद लोगों को जब परेशानी झेलनी पड़ रही हो तो सवाल उठना लाजमी है.

दरअसल राज्य के सबसे बड़े अस्पताल कहे जाने वाले रिम्स में छह शव वाहन ट्रामा सेंटर में पड़े हुए हैं. जिसे अब तक इस्तेमाल में नहीं लाया गया है, बिना शव वाहन के 1500 बेड वाले अस्पताल रिम्स में मरीजों को निजी एंबुलेंस का सहारा लेना पड़ता है. जिसके लिए उन्हें मोटी रकम भी खर्च करनी पड़ती है, लिहाजा गरीब मरीज के लिए लाए गए शव वाहन खड़ी रिम्स की शोभा बढ़ा रही है.

रिम्स में करीब 70 निजी एंबुलेंस संचालित होते हैं. ऐसे में मरीजों के लिए शव वाहन नहीं होने पर निजी एंबुलेंस से उनका सहारा बनता है. इस बाबत रिम्स चिकित्सा अधीक्षक डॉ विवेक कश्यप से जब बात की गई तो उन्होंने भी कबूल किया कि गाइडलाइन के कमी के अभाव में अभी तक शुरू नहीं हो पाया है.

जाहिर है लाखों रुपए की लागत से खरीदे गए 6 नए शव वाहन रिम्स की शोभा बढ़ा रही है, अधिकारी गाइडलाइन का हवाला दे रहे हैं. लिहाजा गरीब मरीज को अपने परिजनों के शव को घर तक ले जाने के लिए मोटी रकम खर्च करनी पड़ रही है. अब सवाल है कि आखिरकार सूबे के सबसे बड़े अस्ताल का तमगा प्राप्त रिम्स की व्यवस्था कब सुधरेगी.