बिहार: बाल दिवस पर स्लोगन पेंटिग का हुआ आयोजन, कुरीतियों को दूर करने की ली गई शपथ

बाल अधिकारों के संरक्षण हेतु नारा हर बच्चे का है 'अधिकार, रोटी, खेल, पढ़ाई, प्यार, बच्चा-बच्चा करे पुकार अब बंद करो बाल मजदूरी ,बाल विवाह, बाल व्यापार, बेटी मेरी अभी पढ़ेगी, बाल विवाह की सूली नहीं चढ़ेगी.

बिहार: बाल दिवस पर स्लोगन पेंटिग का हुआ आयोजन, कुरीतियों को दूर करने की ली गई शपथ
बाल दिवस पर स्लोगन पेंटिग का हुआ आयोजन.

सीतामढ़ी: बिहार के सीतामढ़ी में 'बाल दिवस' (Children Day)  के अवसर पर बचपन बचाओ आंदोलन'  के द्वारा डुमरा प्रखंड के बरहरवा गांव में विभिन्न जगहों पर स्लोगन पेंटिंग का कार्य शुरू करवाया गया है. जो बच्चों के उज्ज्वल भविष्य एवं उनकी सुरक्षा हेतु सबों को जागरूक करने का कार्य करेगा.

बाल अधिकारों के संरक्षण हेतु नारा हर बच्चे का है 'अधिकार, रोटी, खेल, पढ़ाई, प्यार , बच्चा-बच्चा करे पुकार अब बंद करो बाल मजदूरी ,बाल विवाह, बाल व्यापार, बेटी मेरी अभी पढ़ेगी, बाल विवाह की सूली नहीं चढ़ेगी' आदि नारा लिखवाकर गांव को बाल शोषण मुक्त बनाने का संकल्प लिया गया. 

इस मौके पर जिला बाल संरक्षण इकाई के सामाजिक कार्यकर्ता अभिषेक कुमार एवं बचपन बचाओ आंदोलन के कार्यकर्ता मुकुंद चौधरी ने बच्चों को बाल दिवस के अवसर पर चॉकलेट, पुस्तिका देकर प्रोत्साहन किया तथा बाल श्रम एवं बाल विवाह जैसे कुरीतियों को दूर करने का शपथ लिया.

मुकुंद चौधरी ने बताया कि बाल शोषण मुक्त गांव बनाने के लिए बचपन बचाओ आंदोलन के द्वारा डुमरा प्रखंड के राजोपट्टी एवं परिहार प्रखंड के चांदपुरा गांव में भी स्लोगन पेंटिंग करवाई जाएगी. इन तीनों गांव के  सात बाल मजदूरों को पूर्व में बाल मजदूरी से बचपन बचाओ आंदोलन ने प्रशासन की मदद से मुक्त करवाया है.

उन्होंने कहा कि ग्रामीण स्तरीय बाल संरक्षण समिति जो कि बचपन बचाओ आंदोलन ने जिला बाल संरक्षण इकाई के साथ मिलकर बनाई है, ताकि इन गांवो से जो बच्चे मुक्त हुए हैं वह फिर से बाल तस्करी का शिकार न हो. साथ ही दूसरे बच्चे भी बाल मजदूरी और बाल तस्करी के शिकार ना हो. चौधरी ने कहा कि जो सपना बचपन बचाओ आंदोलन के  संस्थापक नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने देखा है उसे  पूरा करने के लिए इस तरह के कदम उठाए जा रहे हैं.