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बिहार: नवरात्रि में गया में झलकती गंगा-जमुनी तहजीब, चंदा वसूलने का भी है नायाब तरीका

गया शहर के पांडरिम मुहल्ले में कई पीढ़ियों से दुर्गा पूजा पंडाल निर्माण में यहां के करीब आधा दर्जन मुस्लिम परिवार बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं. 

बिहार: नवरात्रि में गया में झलकती गंगा-जमुनी तहजीब, चंदा वसूलने का भी है नायाब तरीका
मुस्लिम भी तन, मन और धन से पंडाल निर्माण में मदद करते हैं.

जयप्रकाश, गया: मोक्ष की नगरी गया यूं तो धार्मिक सद्भाव को लेकर विश्व विख्यात है. यहां हिंदू और बौद्ध सम्प्रदाय के एक से बढ़कर एक धार्मिक केंद्र हैं, जिसे देखने दुनियाभर के लोग गया पहुंचते हैं. लेकिन गया (Gaya) शहर के कोतवाली थाना इलाके के पांडरिम मुहल्ले में दुर्गा पूजा (Durga Puja) का जो पंडाल बनाया जाता है उसकी चर्चा भी दूर-दूर तक हो रही है. यहां के पूजा पंडाल की चर्चा जिन दो वजहों से होती है उनमें एक है धार्मिक सद्भाव और दूसरा है पंडाल बनाने के लिए चंदा इकट्ठा करने का इनका यूनिक तरीका.

नवरात्रि में शक्ति की उपासना के लिए पूजा पंडाल के निर्माण में न सिर्फ हिंदू धर्म को मानने वाले लोग मदद करते हैं, बल्कि इलाके के मुस्लिम भी तन, मन और धन से पंडाल निर्माण में मदद करते हैं. खास बात यह है कि इस दुर्गा पूजा पंडाल में ये रवायत पीछली कई पीढ़ियों से चली आ रही है. इस इलाके में रहने वाले लोगों का कहना है कि माता रानी की कृपा से यहां किसी प्रकार का कोई धार्मिक तनाव नहीं होता.

गया शहर के पांडरिम मुहल्ले में कई पीढ़ियों से दुर्गा पूजा पंडाल निर्माण में यहां के करीब आधा दर्जन मुस्लिम परिवार बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं. पूजा समिति के सदस्य मोहम्मद ताहिर का कहना है कि सामाजिक सद्भाव और भाईचारे का ये सिलसिला कई पीढ़ियों से चला आ रहा है. पंडाल के माध्यम से हिंदु-मुस्लिम एकता की मिसाल पेश कर यहां के बुजुर्ग नई पीढ़ी को भी सद्भाव के साथ रहने की सीख देते नज़र आते हैं. 

सालोंभर वसूला जाता है चंदा 
धार्मिक सद्भाव के बाद पांडरिम पूजा पंडाल की दूसरी खासियत है यहां पंडाल निर्माण और धार्मिक गतिविधियों के लिए पैसा जमा करने का अनूठा तरीका. गया के पांडरिम मुहल्ले में ज्यादातर लोग पान के पत्तों के व्यवसाय से जुड़े हुए हैं. इनलोगों ने ये तय कर रखा है कि पूरे साल पान की हर एक टोकरी की बिक्री पर पांच रुपए दुर्गा पूजा के पंडाल निर्माण के लिए जमा किए जाएंगे. यही वजह है कि यहां के लोगों को पंडाल निर्माण के लिए पूजा के समय चंदा वसूलने की जरूरत नहीं पड़ती.

पूजा समिति के सदस्य संतोष चौरसिया कहते हैं कि पैसे इकट्ठा करने की यह परंपरा कई पीढ़ियों से चली आ रही है. पूजा समिति के ही एक और सदस्य संजय चौरसिया कहते हैं कि सालभर पैसे जमा करने और उसी पैसे से पंडाल बनाने के कारण हमलोगों को पूजा के समय बाजार में और घर-घर घूमकर चंदा वसूलने की जरूरत नहीं पड़ती. यहां के पूजा पंडाल को लेकर पैसे की चिंता हिंदु और मुसलमान दोनों समुदाय के लोग हर रोज करते हैं.

-- Adhinath Jha, News Desk