झारखंड: महाशिवरात्रि के पहले बैद्यनाथ धाम में हुई विशेष पूजा-अर्चना, मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़

शिवरात्रि के 2 दिन पहले बाबा मंदिर और पार्वती मंदिर के शीर्ष पर विराजमान पंचशूल को उतारा जाता है और आज विधिवत पूजन के बाद इसे फिर से मंदिर के सिर पर स्थापित कर दिया जाता है.

झारखंड: महाशिवरात्रि के पहले बैद्यनाथ धाम में हुई विशेष पूजा-अर्चना, मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़
बाबा धाम देवघर में सभी मंदिरों के पंचशूल की विधिवत पूजा की गई.

देवघर: महाशिवरात्रि (Mahashivratri) को लेकर झारखंड के बाबा धाम देवघर में कई अनोखी परंपराएं निभाई जाती है, जो किसी अन्य मंदिर में नहीं होती हैं. इन्हीं परंपराओं की वजह से बैद्यनाथ धाम मंदिर (Baidyanath Temple) 12 ज्योतिर्लिंगों में अपना-अलग स्थान रखता है.

शिवरात्रि के 2 दिन पहले बाबा मंदिर और पार्वती मंदिर के शीर्ष पर विराजमान पंचशूल को उतारा जाता है और आज विधिवत पूजन के बाद इसे फिर से मंदिर के सिर पर स्थापित कर दिया जाता है. आज शिवरात्रि के ठीक 1 दिन पहले बाबा धाम देवघर में सभी मंदिरों के पंचशूल की विधिवत पूजा की गई. इस पूजा को सरदार पंडा गुलाब नंद ओझा ने संपन्न कराया.

इसके बाद, मंदिरों के पंचशूल को बारी-बारी से सभी मंदिरों पर स्थापित किया गया. फिर सरदार पंडा के द्वारा साल का पहला गठबंधन भी चढ़ाया गया. गौरतलब है कि 1 दिन तक यह गठबंधन नहीं होता है और आज पहला गठबंधन बांधा गया. वहीं, पौराणिक कथाओं के मुताबिक, पंचशूल 5 शक्ति का द्योतक है और यह नगर की सुरक्षा करता है. विष्णु पुराण में या वर्णित है कि लंकापति रावण के लंका में भी पंचशूल लगाया जाता था, क्योंकि बैधनाथ मंदिर की स्थापना भी रावण के द्वारा हुई है.

ऐसे में यहां भी पंचशूल की परंपरा रही है. पंचशूल लगने और गठबंधन हो जाने के बाद विधि-विधान से मंदिर में पूजा अर्चना शुरू कर दी गई है. इस अलौकिक दृश्य को देखने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी और स्पर्श करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है. इस मौके पर मंदिर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी.