लालू ने सृजन घोटाले को बताया 15000 करोड़ का महाघोटाला, नीतीश-सुशील से मांगा इस्तीफा

लालू ने आरोप लगाया कि 2013 में भागलपुर के तत्कलीन जिलाधिकारी ने सृजन मामले में शिकायत मिलने पर जांच का आदेश दिया था, लेकिन जांच रिपोर्ट आज तक नहीं आई.

लालू ने सृजन घोटाले को बताया 15000 करोड़ का महाघोटाला, नीतीश-सुशील से मांगा इस्तीफा
पटना में अपने आधिकारिक आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते लालू प्रसाद यादव. (PHOTO : IANS, 20 August, 2017)

पटना: राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी पर भागलपुर जिले के करोड़ों रुपये की सरकारी राशि के गबन की जानकारी होने के बावजूद इस मामले को जानबूझकर दबाए रखने का रविवार (20 अगस्त) को आरोप लगाते हुए दोनों से इस्तीफा दिए जाने की मांग की. लालू ने यहां दस सकुर्लर रोड स्थित अपनी पत्नी और पूर्व उपमुख्यमंत्री राबड़ी देवी के आवास पर पत्रकारों को संबोधित करते हुए नीतीश एवं सुशील पर भागलपुर जिले में सजृन महिला सहयोग समिति नामक एक स्वयं सेवी संगठन द्वारा किये गये सरकारी राशि के करोड़ों रुपये के गबन (950 करोड़ रुपये से अधिक) की पहले से जानकारी होते हुए इसे दबाए रखने का आरोप लगाते हुए दोनों से अपने-अपने पदों से इस्तीफा दिए जाने की मांग की और कहा कि वे जब तक अपने पद से इस्तीफा नहीं देते तब तक राजद का आंदोलन जारी रहेगा.

उन्होंने आरोप लगाया कि 25 जुलाई 2013 को संजीत कुमार नामक एक चार्टर्ड अकाउंटेंट और सामाजिक कार्यकर्ता ने नीतीश को सजृन महिला सहयोग समिति द्वारा करोड़ों के गबन से संबंधित जानकारी देते हुए एक विस्तृत पत्र लिखा था लेकिन नीतीश ने उस पर न केवल कोई कार्रवाई की बल्कि घोटाले करने वालों को बचाया. उन्होंने कहा कि 9 सितम्बर 2013 को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बिहार सरकार को पत्र लिखकर सजृन समिति में हो रहे घोटाले और वित्तीय अनियमितता की जांच करने को कहा था. आरबीआई ने कोआपरेटिव रजिस्ट्रार को भी कार्रवाई करने को कहा था लेकिन मुख्यमंत्री ने उस पर भी कोई कार्रवाई नहीं की.

लालू ने आरोप लगाया कि 2013 में भागलपुर के तत्कलीन जिलाधिकारी ने सृजन मामले में शिकायत मिलने पर जांच का आदेश दिया था, लेकिन जांच रिपोर्ट आज तक नहीं आई. उन्होंने पूछा कि नीतीश बताएं उस जांच रिपोर्ट को क्यों दबाया गया? उस जांच रिपोर्ट को दबाकर किसे फायदा पहुंचाया गया? राजद नेता ने सृजन घोटाला मामले में जांच का आदेश देने वाली उक्त जिलाधिकारी का मुख्यमंत्री द्वारा तबादला कर दिए जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि वर्ष 2006 से चल रहे इस घोटाले में नीतीश ने 10 साल तक कार्रवाई क्यों नहीं की?

उन्होंने इस मामले में नीतीश तथा सुशील के सीधे दोषी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि आर्थिक अपराध शाखा ने सजृन घोटाले में लिप्त बिहार सरकार की पदाधिकारी जयश्री ठाकुर के करोड़ों रुपये जब्त किए थे, उसके बावजूद भी शाखा ने पूरे घोटाले की जांच किसके इशारे पर नहीं की. लालू ने कहा कि 2005 से गृह विभाग नीतीश के पास था. नीतीश ने आर्थिक अपराध शाखा की जांच को क्यों छुपाया? उस पर कार्रवाई क्यों नहीं की.

लालू ने कहा कि 14 जुलाई 2013 को एक अखबार में छपी खबर के अनुसार सामान्य प्रशासन और कार्मिक विभाग के तत्कालीन प्रधानसचिव ने कहा था कि जयश्री एडीएम स्तर की अधिकारी है इसलिए उसे सेवा से बर्खास्त करने का अधिकार मुख्यमंत्री के पास है लेकिन मुख्यमंत्री ने उसे इतने वर्षो तक बर्खास्त क्यों नहीं किया? उन्होंने पूछा कि जयश्री ठाकुर की अधिकांश तैनाती भागलपुर और बांका में ही करने का मुख्यमंत्री का क्या उद्देश्य था?

उन्होंने कहा कि वर्ष 2010 में भी हमने एसीडीसी घोटाले को उठाया था, उसके बावजूद भी नीतीश सरकार ने ऐसे घोटालों को जारी रखा. वर्ष 2010-11 में सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में 11000-12000 हजार करोड़ के सरकारी खजाने की अनियमितता का जिक्र किया था? उसके बावजूद भी कोई कार्रवाई नहीं की गयी ? उन्होंने आरोप लगाया ‘‘ केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जांच के आदेश पर मुख्यमंत्री किसे बेवकूफ बना रहे है ? वह कहते हैं कि चेक बाउंस किया तो हमे मालूम हुआ. यह तो 2013 में ही मालूम हो गया था.’’

लालू ने आरोप लगाया कि इस मामले की सीबीआई से जांच की अनुशंसा नीतीश ने अपने मन से नहीं की है, बल्कि उन्हें मालूम हो गया था कि केंद्र सरकार को आरबीआई के जरिए पता चल गया कि वह इसमें फंस रहे हैं और इसी डर से नीतीश बचने के लिए दो घंटे में पाला बदलकर भाजपा की शरण में चले गए. उन्होंने कहा कि क्या वे आरबीआई का सर्कुलर नहीं जानते जिसमें स्पष्ट है कि अगर 30 करोड़ से ज्यादा की कोई वित्तीय अनियमितता है तो उसकी जांच सीबीआई करेगी? यह तो 15000 करोड़ का महाघोटाला है.

लालू ने कहा कि आगामी 27 अगस्त को उनकी पार्टी की रैली समाप्त हो जाने के बाद वे उच्चतम न्यायालय से मामले की जांच की निगरानी करने का आग्रह करेंगे. उन्होंने नीतीश के महागठबंधन छोड़कर भाजपा के साथ मिलकर प्रदेश में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की नई सरकार बनाए जाने पर कटाक्ष करते हुए कहा कि देश में वर्तमान में च​र्चित है, ‘‘बिहार का लिट्टी-चोखा और नीतीश का धोखा’’. इस अवसर पर मौजूद पूर्व मंत्री और सांसद शिवानंद तिवारी को लालू ने अपनी पार्टी में शामिल किए जाने तथा उन्हें राजद का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए जाने की घोषणा की.