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पाकुड़: एसएसजी ग्रुप ने बदली महिला की तकदीर, डूबते को मिला तिनके का सहारा

सारोगी देवी नाम की महिला जैसे तैसे अपने परिवार का पालन पोषण कर रही थी. पति की कमाई से ही घर के खर्चे निकल जाते थे. तभी एक दिन कुछ ऐसा हुआ, जिसने महिला की तकदीर ही बदल डाली.   

पाकुड़: एसएसजी ग्रुप ने बदली महिला की तकदीर, डूबते को मिला तिनके का सहारा
पति की कमाई से ही घर के खर्चे निकल जाते थे.

पाकुड़: झारखंड के पाकुड़ के जयनगर पंचायत के नारायणपुर की रहने वाली सारोगी देवी नाम की महिला जैसे तैसे अपने परिवार का पालन पोषण कर रही थी. पति की कमाई से ही घर के खर्चे निकल जाते थे. तभी एक दिन कुछ ऐसा हुआ, जिसने महिला की तकदीर ही बदल डाली. 

परिवार की आर्थिक तंगी को समझते हुए सागोरी देवी के दरवाजे पर एसएसजी ग्रुप से जुड़ने के लिए कुछ महिलाएं आईं. लिहाजा ग्रुप का नियम कानून और इससे मिलने वाले लाभ के बारे में बताया गया. बस फिर क्या था, महिला ने सब कुछ अपने परिवार को बताया, जिसके बाद जब परिवार की ओर से उन्हें स्वीकृति मिली, तो वो ग्रुप से जुड़ गई. 

सागोरी देवी सुरज नाम से एसएसजी ग्रुप बनाकर चलाने लगी. लेकिन परिवार को क्या पता था कि उनपर दुख के बादल मंडरा रहे हैं. अभी ग्रुप का काम शुरु ही हुआ था कि पति का निधन हो गया. परिवार पर मानो जैसे दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. 

परिवार के सामने आर्थिक संकट आकर खड़ा हो गया. सागोरी देवी के सामने दो बच्चे थे, जिनका पालन-पोषण अब उन्हें अकेले ही करना था. परिवार में एकदम मातम पसर गया. ऐसे समय में सागोरी देवी ने ग्रुप की मदद ली, और बच्चों के खाने-पीने से लेकर पढ़ाई तक की जिम्मेदारी पूरी की. साथ ही बकरी पालन के काम को भी शुरु किया. 

इस काम के लिए 60 हजार रुपये का लोन लिया. जिससे समय बीतने के साथ साथ उनकी अच्छी खासी आमदनी होने लगी. बस फिर क्या था, परिवार एक बार फिर से खुशहाल हो गया. धीरे-धीरे उनकी आर्थिक स्थिति भी सुधरने लगी. सागोरी देवी ने दुसरी महिलाओं को भी ग्रुप में काम करने के लिए प्रेरित किया. अब गांव की दर्जनों महिलाएं सागीरी देवी को देखकर ग्रुप से जुड़ी हैं और काम कर रही हैं.