close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

बिहार : CM नीतीश ने देखा मधुबनी में गिरा रहस्यमय पत्थर, म्यूजियम में रखने का आदेश

इस पत्थर का वजन करीब 13 किलोग्राम है. गांव के लोगों का दावा है कि यह आसमान से गिरा है. जब यह पत्थर गिरा था तब बहुत तेज आवाज हुई थी. 

बिहार : CM नीतीश ने देखा मधुबनी में गिरा रहस्यमय पत्थर, म्यूजियम में रखने का आदेश
नीतीश कुमार ने किया संभावित उल्कापिंड का अवलोकन.

पटना: मधुबनी के लौकही में आसमान से गिरा पत्थर कौतुहल का विषय बना हुआ था. 22 जुलाई को मधुबनी के लौकही स्थित एक धान के खेत में आसमान से तेज गड़गड़ाहट साथ पत्थर गिरा जिससे शुरू में प्रत्यक्षदर्शी डर गए लेकिन बाद में पत्थर गिरे जगह पर खोजबीन करने पर जमीं में धंसे लगभग 10 किलग्राम वजन के पत्थर से अचंभित हो गए. इसकी सूचना जिलाधिकारी तक पहुंची और वहां से पत्थर दो दिन बाद बुधवार को मुख्यमंत्री आवास एक अणे मार्ग लाया गया. 

मुख्यमंत्री आवास में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पत्थर का अवलोकन किया. इस मौके पर मुख्यमंत्री आवास में भूगर्भशास्त्री बुलाए गए जिनके अनुसार ये उल्का पिंड है. मधुबनी में इस आकाशीय पिंड के साथ स्थानीय लोगों ने खूब तस्वीर खींची और इसकी चर्चा दूर-दूर तक हो रही है. लोग उस स्थान को भी देखने आ रहे हैं. ये पत्थर आसमान से गिरा था. स्थानीय लोगों ने जब उस पत्थर में चुंबक सटाया तो यह पत्थर ने चुम्बक को आकर्षित कर लिया. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी इस ख़ास पत्थर को जिज्ञासा के साथ देखे और इसका बारीकी से मुआयना किया. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी इस पत्थर में चुंबक को सटाकर देखा. भूगर्भशास्त्री के अनुसार इस पथ्थर में लौह अयस्क, मैग्नेशियम और ऑल्विन जैसे तत्व हैं. 

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने  घोषणा की कि इस पत्थर को जांच पड़ताल के बाद बिहार संग्रहालय में रखा जाएगा जिससे आम लोग इस पत्थर को देख सके. इस पत्थर को विज्ञानं एवं प्रौद्योगिकी विभाग को जांच पड़ताल के लिए सौपा गया है. जांच पड़ताल के बाद इसे बिहार संग्रहाल में रखा जाएगा. 

पटना विश्वविद्यालय में भूगर्भशास्त्र के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉक्टर अतुल आदित्य पांडेय ने इस रहस्य्मयी पत्थर पर  अपनी राय जाहिर की. अतुल आदित्य पांडेय के मुताबिक, भूगर्भशास्त्र से जुड़े लोगों  के लिए उल्कापिंड या इस तरह की चीजों का गिरना एक सामान्य प्रक्रिया है.उनके मुताबिक बिहार में पहले भी मुजफ्फरपुर, मोतिहारी जिले में उल्कापिंड गिरने  की घटना हुई है. 

पांडेय कहते हैं कि दरअसल पृथ्वी और उसके ग्रह के चारों ओर बने प्लेटेनरी बॉडीज गुरुत्वाकर्षण से उल्कापिंड आकर्षित होते हैं. अधिकतर मामलों में ये उल्कापिंड वायुमंडल से जब निकलते हैं तो इनकी गति इतनी तेज होती है कि ये कुछ देर में ही राख हो जाते हैं. कभी-कभी ऐसा भी होता है कि ये उल्कापिंड गुरुत्वाकर्षण की वजह  धरती पर बिना जले या राख हुए धरती पर गिर जाते हैं.

पांडेय का कहना है कि उल्का पिंडों के अध्यय़न से काफी जानकारी मिलती है. उल्कापिंड का अध्ययन करने से इसकी उम्र की जानकारी और इसके साथ ही पृथ्वी और उसके आसपास के ग्रहों में जो हलचल होती है, उसकी भी जानकारी मिलती है. पांडेय के मुताबिक, उल्कापिंड में ऊष्णता यानि गर्मी ज्यादा होती है. धरती से डायनासोर जैसे भारी भरकम जानवरों के विलुप्त होने में उल्कापिंड की भूमिका अहम रही है.