दरभंगा : फ्रांसीसी तकनीक के इस्तेमाल से 50 पैसे प्रति लीटर मिलेगा पानी

एक छोटे से तालाब में शुरू की गई इस परियोजना में फ्रांसीसी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. इस प्रौद्योगिकी के जरिए तालाब के गंदे पानी को शुद्ध कर 50 पैसे में एक लीटर पानी मुहैया करवाया जाएगा. 

दरभंगा : फ्रांसीसी तकनीक के इस्तेमाल से 50 पैसे प्रति लीटर मिलेगा पानी
प्रतिदिन 8000 लीटर पानी को पीने योग्य बनाया जाएगा.

दरभंगा : बिहार के दरभंगा जिले में पेयजल समस्या का समाधान करने के लिए एक योजना की शुरुआत की गई. इसके तहत संदूषित जल का शोधन कर पेयजल उपलब्ध करवाया जाएगा. यह सरकार की एजेंसियों की मदद से निजी क्षेत्र में शुरू की गई है. गर्मी के दिनों में यहां पेयजल का गंभीर संकट बना रहता है. जिले में आर्सेनिक से दूषित गंदा पानी मिलता है. 

'सुलभ जल' ब्रांड की इस परियोजना का शुरुआत शनिवार को किया गया. एक छोटे से तालाब में शुरू की गई इस परियोजना में फ्रांसीसी तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. इस प्रौद्योगिकी के जरिए तालाब के गंदे पानी को शुद्ध कर 50 पैसे में एक लीटर पानी मुहैया करवाया जाएगा. 

सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक बिंदेश्वर पाठक ने परियोजना की नींव रखी. इस मौके पर दरभंगा के विधायक संजय सरावगी और जिलाधिकारी चंद्रशेखर प्रसाद सिंह मौजूद थे. पाठक ने कहा, "यह दुनिया में पहला मौका है, जब हमें नई प्रौद्योगिकी के प्रयोग से नाम मात्र की लागत से शुद्ध पेयजल बनाने में कामयाबी मिली है. गांव के लोगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा."

प्रायोगिक परियोजना का कार्यान्वयन नागरिक प्राधिकरणों के सहयोग से किया जाएगा और बाद में इसे प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी शुरू किया जाएगा.

प्रयोग के आधार पर इससे पहले पश्चिम बंगाल के 24 परगना, मुर्शिदाबाद और नादिया जिलों में सुलभ जल की परियोजना शुरू की गई थी, जहां पानी में आर्सेनिक पाया जाता है. फ्रांसीसी संगठन के साथ मिलकर सुलभ द्वारा तीन साल पहले शुरू की गई यह योजना वहां सफल रही. 

नई जल शुद्धीकरण प्रक्रिया के तहत 8,000 लीटर पेयजल रोज तैयार किया जाएगा जिसपर लागत खर्च काफी कम होगा. 

पाठक ने कहा, "यह उपकारी कार्य के तहत महज 50 पैसे प्रति लीटर की दर से पीने का पानी उपलब्ध कराया जाएगा. हरिबोल तालाब पर स्थापित संयंत्र का संचालन बगैर लाभ के आधार पर किया जाएगा और इसका प्रबंधन दरभंगा नगर निगम के स्वयं सहायता समूह द्वारा किया जाएगा."

परियोजना में मशीन स्थापित करने की लागत 20 लाख रुपये होगी, जिसमें फ्रांसीसी संगठन, सुलभ और ग्रामीणों की साझेदारी होगी.  स्थानीय लोग और एनजीओ की ओर से इसका रखरखाव किया जाएगा. पाठक ने कहा कि इस परियोजना में रोजगार का भी सृजन होगा. 

(एजेंसी इनपुट के साथ)