IRCTC घोटाले में CBI के खिलाफ याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

जस्टिस एके सिकरी और जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ता वेंकटेश शर्मा को हाईकोर्ट जाने की सलाह दी.

IRCTC घोटाले में CBI के खिलाफ याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
फाइल फोटो

नई दिल्‍ली : आईआरसीटीसी घोटाले में पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने वाले वेंकटेश शर्मा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया है. जस्टिस एके सिकरी और जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ ने मंगलवार को याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता वेंकटेश शर्मा को हाईकोर्ट जाने की सलाह दी है.

Supreme court denies to hear petition against CBI in IRCTC scam

दरअसल वेंकटेश शर्मा ने सीबीआई पर आरोपियों को बचाने का आरोप लगाते हुए कहा था कि नौकरी के बदले जमीन के पहलू को जांच से बाहर रखा जा रहा है. याचिका में पूरे मामले की एसआईटी जांच और सीबीआई डायरेक्ट के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी. याचिका में कहा गया था कि इस केस में कुछ राजनेताओं को बचाने के लिए सीबीआई ने अपने मैनुअल का उल्लंघन किया.

सीबीआई ने मांगा था प्रोडक्शन वारंट
IRCTC घोटाले के मुख्य मामले में पटियाला हाउस कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव के खिलाफ प्रोडक्शन वारंट जारी किया था. अदालत ने लालू को आगामी 6 अक्‍टूबर को कोर्ट में पेश होने के आदेश जारी किए थे. लिहाजा उन्‍हें पेशी के लिए रांची से दिल्ली लाया जाएगा. सुनवाई के दौरान सीबीआई ने कोर्ट से लालू यादव की पेशी के लिए प्रोडक्शन वारंट की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है.

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लालू के परिवार को मिली थी जमानत
लालू यादव की पत्नी और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव सहित अन्य आरोपियों को राहत देते हुए जमानत दे दी थी. कोर्ट ने मामले पर सुनवाई करते हुए सभी आरोपियों को एक लाख के निजी मुचलके पर जमानत दे दी थी इस मामले में पौने दस बजे तेजस्वी अपनी मां के साथ पटियाला हाउस कोर्ट पहुंचे थे. सभी आरोपियों ने कोर्ट में जमानत की अर्जी दी थी.

सीबीआई ने दाखिल की थी चार्जशीट
IRCTC घोटाले मामले में आरोपी बनाते हुए सीबीआई ने 16 अप्रैल को पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव और इससे जुड़े अन्य लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी. लालू की पत्नी राबड़ी और उनके बेटे तेजस्वी यादव भी उन 14 लोगों में शामिल थे, जिनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी. जबकि जांच एजेंसी ने उस समय आईआरसीटीसी के जीएम बीके अग्रवाल के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी थी. सूत्रों के मुताबिक रेल मंत्री ने केंद्रीय सतर्कता आयुक्त की सलाह पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के सेक्शन-19 के तहत अभियोग चलाने की मंजूरी दी थी.

क्या है पूरा मामला
यह मामला इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कार्पोरेशन (आईआरसीटीसी) द्वारा रांची और पुरी में चलाए जाने वाले दो होटलों की देखरेख का काम सुजाता होटल्स नाम की कंपनी को देने से जुड़ा है. विनय और विजय कोचर इस कंपनी के मालिक हैं. इसके बदले में कथित तौर पर लालू को पटना में बेनामी संपत्ति के रूप में तीन एकड़ जमीन मिली. 

एफआईआर में कहा गया था कि लालू ने निजी कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया. इसके बदले में उन्हें एक बेनामी कंपनी डिलाइट मार्केटिंग की ओर से बेशकीमती जमीन मिली. सुजाता होटल को ठेका मिलने के बाद 2010 और 2014 के बीच डिलाइट मार्केटिंग कंपनी का मालिकाना हक सरला गुप्ता से राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के पास आ गया. हालांकि इस दौरान लालू रेल मंत्री के पद से इस्तीफा दे चुके थे.