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JDU की याचिका पर SC का शरद यादव को नोटिस, अयोग्यता मामले में बढ़ सकती हैं मुश्किलें

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट से कहा है कि वो दो हफ्ते तक मामले की सुनवाई टाल दे. 

JDU की याचिका पर SC का शरद यादव को नोटिस, अयोग्यता मामले में बढ़ सकती हैं मुश्किलें
शरद यादव को सुप्रीम कोर्ट ने भेजा नोटिस. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली/पटना : राज्यसभा की सदस्यता से आयोग्य करार दिए गए शरद यादव के खिलाफ जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है. जस्टिस एके सिकरी और जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ ने जेडीयू की याचिका पर सुनवाई करते हुए शरद यादव को नोटिस जारी कर दो हफ्ते में जवाब मांगा है. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट से कहा है कि वो दो हफ्ते तक मामले की सुनवाई टाल दे. 

जेडीयू नेता रामचंद्र प्रसाद सिंह (आरसीपी सिंह) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दिल्ली हाईकोर्ट के 11 सितंबर के आदेश को चुनौती दी है. इससे पहले हाईकोर्ट में शरद यादव की नई पार्टी बनाने को लेकर जेडीयू ने अर्जी दायर कर कहा था कि शरद यादव ने नई पार्टी बना ली है, जो साबित करता है कि उनकी सदस्यता रद्द होने का फैसला सही था. ऐसे में इन तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट मामले की सुनवाई करे, लेकिन हाईकोर्ट ने जेडीयू की इस मांग को ठुकराते हुए कहा था कि वो नए तथ्यों पर नहीं बल्कि पुराने तथ्यों के आधार पर सुनवाई करेगा.

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सुप्रीम कोर्ट ने सात जून को अपने आदेश में कहा था कि शरद यादव बतौर सांसद उन्हें मिलने वाले वेतन, भत्ते और दूसरी सुविधायें नहीं ले सकते, लेकिन वह सरकारी बंगले में रह सकते हैं. शरद यादव को राज्यसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित किया जा चुका है, जिसे उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दे रखी है. सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के पिछले साल 15 दिसंबर के आदेश में संशोधन कर दिया था. इसी आदेश में शरद यादव को उनकी याचिका लंबित रहने के दौरान वेतन, भत्ते और दूसरी सुविधायें प्राप्त करने और सरकारी बंगले में रहने की अनुमति दी थी.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में शरद यादव को हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के अनुसार सरकारी बंगले में रहने की अनुमति दे दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने राज्यसभा में जेडीयू के सांसद आरसीपी सिंह की याचिका पर यह आदेश दिया था. सिंह ने हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश को चुनौती दी थी.

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दिल्ली हाईकोर्ट ने 15 दिसंबर 2017 के अपने आदेश में शरद यादव को राज्यसभा सांसद के रूप में अयोग्य घोषित किये जाने पर अंतरिम रोक लगाने से इंकार कर दिया था. हाईकोर्ट ने शरद यादव द्वारा अपनी अयोग्यता को विभिन्न आधार पर चुनौती देने वाली याचिका पर यह अंतरिम आदेश दिया था. यादव का कहना था कि राज्यसभा के सभापति ने चार दिसंबर को उन्हें और एक अन्य सासंद अली अनवर को अयोग्य घोषित करने का फैसला सुनाने से पहले अपना पक्ष रखने के लिये कोई अवसर प्रदान नहीं किया. 

इन दोनों सांसदों को दल बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित किया गया था. जेडीयू अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा पिछले साल जुलाई में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और कांग्रेस के साथ गठबंधन तोड़कर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से हाथ मिलाने पर शरद यादव विपक्ष के साथ मिल गये थे. शरद यादव 2016 में राज्यसभा के लिये निर्वाचित हुए थे और उनका कार्यकाल जुलाई 2022 तक है, जबिक अली अनवर का कार्यकाल अप्रैल में पूरा हो गया था.