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किशनगंज: सरपंच ने निकाला कचहरी के आदेश को पूरा ना करने पर जमानती वारंट, हुए अरेस्ट

जहां ग्राम कचहरी के आदेश की अवहेलना करना आरोपी को मंहगा पड़ गया. दरअसल गांव के ही रहने वाले समीर उद्दीन और शाह आलम के बीच हाथापाई हो गई थी.

किशनगंज: सरपंच ने निकाला कचहरी के आदेश को पूरा ना करने पर जमानती वारंट, हुए अरेस्ट
ग्राम कचहरी के आदेश की अवहेलना करना आरोपी को मंहगा पड़ गया.

किशनगंज: बिहार के किशनगंज के पहाड़कट्टा थाना क्षेत्र के गांव दामलबाड़ी से अनोखा मामला सामने आया है. जहां ग्राम कचहरी के आदेश की अवहेलना करना आरोपी को मंहगा पड़ गया. दरअसल गांव के ही रहने वाले समीर उद्दीन और शाह आलम के बीच हाथापाई हो गई थी. मामला ग्राम कचहरी तक पहुंचा और दोनों की पेशी हुई. एक आरोपी शमीरउद्दीन तो हर पेशी में पहुंचा लेकिन अभियुक्त शाह आलम और उसके बेटे शहवाज ग्राम कचहरी सरपंच के समन के बावजूद नहीं पहुंचे.

अभियुक्त की मनमानी देख सरपंच ईमामुद्दीन बिहार पंचायत राज 2006 अधिनियम की धारा-119, नियम-13 के अधीन सीजेएम किशनगंज से फॉर्म-6 जमानती वारंट जारी कर अभियुक्त की गिरफ्तारी की मांग की. सरपंच की नियम संगत मांग स्वीकार कर सीजेपी ने संबंधित पहाड़कट्टा थाना को अभियुक्त की गिरफ्तारी कर ग्राम कचहरी न्यायपीठ के सामने पेश कराने के निर्देश दिए. जिसके बाद पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया.

 

क्या हैं सरपंच के अधिकार ?
किशनगंज जिला जज के लोक अभियोजक पी.पी. ने बताया कि सरपंच भी न्यायपालिका का अंग है और न्यायपालिका की तरह ही उसकी भी कार्यप्रणाली है. उन्होंने बताया कि सरपंच को आरोपियों के खिलाफ जमानती वारंट जारी करने का अधिकार है .

क्या है मामला ?
दरअसल एक चाय की दुकान पर समीर उद्दीन और शाह आलम के बीच हाथापाई और मारपीट की घटना हुई थी. जिसके बाद पीड़ित समीरउद्दीन इंसाफ के लिए ग्राम कचहरी पहुंचा. शाह आलम और उसके बेटे शहवाज के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई. जिसके ग्राम पंचायत ने पेशी शुरु की. जिसके बाद कोर्ट के आदेश की अवहेलना को देखते हुएशाह आलम और उसके बेटे के खिलाफ समन जारी किया.

सरपंच ईमामुद्दीन ने बताया कि आसामी उपस्थित नहीं होने कि वजह से उन्होंने नियम के तहत सीजेएम को जमानती वारंट जारी किया. जिसके लिए उन्होंने सीजेएम को धन्यवाद दिया.

कानून की सही जानकारी ना होना और जागरूकता के अभाव में सरपंचों की तरफ से पहले ऐसी कार्रवाई नहीं होती थी. वहीं एमएलसी डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा कि त्रिस्तरीय पंचायती राज में ,यही सपना देखा गया है कि पंचायत स्तर पर लोगों को सुविधा और न्याय मिले. और इसी के लिए भारत सरकार ने पंचायत राज भवन बनाने का काम किया है. 
Adesh Singh, News Desk