'आयुष्मान भारत' के आंकड़ों में फिसड्डी साबित हुआ बिहार, डैमेज कंट्रोल में जुटे सुशील मोदी

बिहार के डिप्टी सीएम ने सोशल मीडिया पर आयुष्मान योजना की न केवल जमकर तारीफ की है, बल्कि अपने विरोधियों को निशाने पर भी लिया है.

'आयुष्मान भारत' के आंकड़ों में फिसड्डी साबित हुआ बिहार, डैमेज कंट्रोल में जुटे सुशील मोदी
सुशील मोदी ने जमकर की आयुष्मान भारत योजना की तारीफ. (फाइल फोटो)

राजेश कुमार, पटना: नरेंद्र मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना 'आयुष्मान भारत' को को लेकर हाल ही में जो एक रिपोर्ट आए हैं उसमें बिहार फिसड्डी साबित होता दिख रहा है. आंकड़े सामने आने के बाद बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी योजना की सराहना करने में जुट गए हैं. उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 50 करोड़ गरीबों को हर साल 5 लाख रुपये तक का इलाज मुफ्त में कराने की सुविधा देने के लिए जब आयुष्मान भारत योजना शुरू की थी, तब विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसकी सराहना की थी. इसे गरीबों के लिए दुनिया की सबसे बड़ी कल्याणकारी योजना बताया था.' 

इतना ही नहीं सुशील मोदी ने अपने ऑफिसियल ट्विटर हैंडल पर जारी किए गए एक पोस्टर में आगे लिखा है, 'ग़रीबों के वोट पर पुश्तैनी दावा करने वाले जिन लोगों ने इस योजना पर चुप्पी साधी थी या चुनावी घोषणा बताया था, वे अब बिहार-यूपी जैसे कुछ राज्यों में वांछित सफलता नहीं मिलने पर छाती पीट रहे हैं.' इसके आगे बिहार के उपमुख्यमंत्री लिखते हैं कि राज्य सरकार योजना के क्रियान्वयन में तेजी लाने के लिए मरीजों को गोल्डन कार्ड बनाने में आने वाली कठिनाइयां दूर करेगी.

बिहार के डिप्टी सीएम ने सोशल मीडिया पर आयुष्मान योजना की न केवल जमकर तारीफ की है, बल्कि अपने विरोधियों को निशाने पर भी लिया है. अब हम आपको बताते हैं कि आखिर उन्हें अचानक सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजना आयुष्मान भारत की याद क्यों आई है. 

दरअसल, आंकड़ों के मुताबिक, बिहार में 'आयुष्मान भारत योजना' की स्थिति चिंताजनक है. केंद्र सरकार की इस महत्वकांक्षी योजना को लेकर दावे तो बड़े-बड़े किए गए, लेकिन बिहार में इसका हाल कहीं से भी संतोषजनक नहीं है. कार्ड होने के बाद भी मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है. अगर दक्षिण भारत के राज्यों से बिहार की तुलना करें तो स्वास्थ्य सेवाओं की सूबे में भारी कमी है बावजूद 'आयुष्मान' का लाभ लोगों को नहीं मिल रहा है.

'आयुष्मान भारत योजना' की शुरुआत गरीबों को मुफ्त में 5 लाख का इलाज मुहैया कराने के लिए किया गया था. इसमें सभी आयुष्मान कार्ड धारकों का हर साल पांच लाख तक का इलाज मुफ्त में होता है. सितम्बर 2019 तक की स्थिति पर नज़र डालें तो इसके तहत 7581 करोड़ रुपये ग़रीबों के निशुल्क इलाज पर खर्च हुए. इसमें से पचास फीसदी खर्च का लाभ तमिलनाडु, गुजरात, आंध्रप्रदेश और कर्नाटक के लोगों को मिला, जबकि बिहार इस मामले में बेहद पीछे रहा. इस राशि में बिहार में मात्र 89 करोड़ 19 लाख रुपये खर्च हुए. बिहार में महज 90 हज़ार 620 मरीजों को ही आयुष्मान योजना का लाभ मिला है, जो बिहार की बड़ी आबादी के हिसाब से नगण्य है. 

बताया जा रहा है कि बिहार में निजी अस्पतालों की बेरुखी से योजना ढीली पड़ी है. ज़ी बिहार-झारखंड की टीम ने जब सरकारी अस्पतालों में जाकर आयुष्मान योजना की हकीकत जानने की कोशिश की, तो यहां भी हालात बेहतर नज़र नहीं आए. बिहार के स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने हमारी टीम को बताया कि सूबे में ढांचागत विकास बेहतर नहीं होने की वजह से उम्मीद के मुताबिक परिणाम नहीं आए हैं.

बिहार में योजना की हक़ीक़त जानकर आपको समझ में आ गया होगा कि आखिर बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी के मन में आयुष्मान भारत योजना को लेकर अचानक प्रेम क्यों उमड़ आया.