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भोजपुर: आजादी के 70 साल बाद भी सड़क के लिए जूझता यह गांव, बारिश में निकलना मुश्किल

गड़हनी पंचायत के वार्ड नंबर एक में स्थित यह गांव तीन तरफ नदियों से घिरा हुआ है. गर्मी के मौसम में जब नदी सूखी रहती है तो गांव के लोग नदी के रास्ते बाहर निकलते हैं और अपना कामकाज करते हैं. लेकिन बारिश का मौसम आते ही तीनघरवा टोला के लोगों की मुसीबत बढ़ जाती है.

भोजपुर: आजादी के 70 साल बाद भी सड़क के लिए जूझता यह गांव, बारिश में निकलना मुश्किल
गड़हनी पंचायत के वार्ड नंबर एक में स्थित यह गांव तीन तरफ नदियों से घिरा हुआ है.

पटना: देश को आजाद हुए 72 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन आज भी देश के कई इलाके और गांव ऐसे हैं, जो बुनियादी सुविधाओं की समस्या से जूझ रहे हैं. ऐसे गांवों को अभी भी किसी ऐसे शख्स की तलाश है, जो उनकी समस्याओं का दूर कर सके.

 ऐसा ही एक गांव बिहार के भोजपुर जिले के गड़हनी प्रखंड का तीनघरवा टोला है. यह गांव आज भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए जूझ रहा है. एक तरफ सरकार ने हर गांव को सड़क से जोड़ने की योजना का ऐलान किया है तो वहीं यह गांव उस सरकारी योजना को जैसे मुंह चिढ़ा रहा है. 

 

गड़हनी पंचायत के वार्ड नंबर एक में स्थित यह गांव तीन तरफ नदियों से घिरा हुआ है. गर्मी के मौसम में जब नदी सूखी रहती है तो गांव के लोग नदी के रास्ते बाहर निकलते हैं और अपना कामकाज करते हैं. लेकिन बारिश का मौसम आते ही तीनघरवा टोला के लोगों की मुसीबत बढ़ जाती है. गांव से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है. जब तक नदी में पानी रहता है तबतक बच्चों का दूसरे गांव में बने स्कूल तक आना-जाना भी बिल्कुल बंद हो जाता है.

अगर गांव में कोई बीमार हो जाता है, तो मुसीबत और भी बढ़ जाती है. ऐसी हालत में लोग मरीज को खाट पर लादते हैं और फिर कंधे पर बीमार को लादकर नदी पार करते हैं और अस्पताल तक पहुंचाते हैं. इनदिनों जब बिहार में हर तरफ बाढ़ आयी हुई है तो तीनघरवा के लोगों की मुसीबत भी बढ़ी हुई है. खाने-पीने और जरुरत के अन्य सामान भी लोग नाव के जरिए लादकर दूसरी जगहों से लाते हैं.

गांव के सामाजिक कार्यकर्ता और युवा नेता अविनाश राय का कहना है कि गांव से बाहर निकलने का रास्ता बंद होने के बाद जिलाधिकारी से नाव उपलब्ध कराने की गुहार लगायी गयी, लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद अबतक कोई सुध लेने नहीं पहुंचा. 

इस गांव की ये हालत तब है जब कि इसकी दूरी प्रखंड कार्यालय से महज 2 किलोमीटर दूर है. गांव तक सड़क और पुलिया निर्माण के लिए समय-समय पर ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों और शासन-प्रशासन के सामने गुहार भी लगायी, लेकिन आजतक उनकी समस्या का समाधान नहीं किया गया.

जब इस बारे में प्रशासनिक अधिकारियों से बात की जाती है, तो उनके मुंह पर ताला लग जाता है. सच तो यही है कि एक अदद सड़क के लिए तररसता तीनघरवा टोला आजादी के इतने साल बीत जाने के बाद भी विकास के दावे को मुंह चिढ़ाता दिख रहा है.
Dharmendra Mani Rajesh, News Desk