बगहा: मशाल जुलूस के साथ शुरू थारू महोत्सव, SC/ST दर्जा दिए जाने की मनाई जाती है खुशी

थरुहट की राजधानी हरनाटांड में थारू आदिवासी समाज की ओर से आयोजित महोत्सव में झमटा और बीरहनी जैसे विलुप्त होती लोक सांस्कृतिक रंगारंग कार्यक्रमों की प्रस्तुति विशेष आकर्षण का केंद्र रहा. 

बगहा: मशाल जुलूस के साथ शुरू थारू महोत्सव, SC/ST दर्जा दिए जाने की मनाई जाती है खुशी
बगहा: मशाल जुलूस के साथ शुरू थारू महोत्सव, SC/ST दर्जा दिए जाने की मनाई जाती है खुशी.

इमरान अजीज/बगहा: आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र बगहा के हरनाटांड़ में प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी थारू महोत्सव हर्ष उल्लास के साथ धूमधाम से मनाया गया. भारत-नेपाल सीमा पर उतरांचल के वाल्मीकिनगर से मैनाटांड़ तक जंगल के छोर में बसे छ: तपाओं के थारू आदिवासी अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिलने के बाद ख़ुशी में हर साल आठ जनवरी को इसे महोत्सव के रूप में मनाते हैं. 

संघीय भवन में झंडोत्तोलन कर मशाल जुलूस निकालकर अपनी एकजुटता और एकता को दर्शाने कि भी परंपरा चली आ रही है. इसी कड़ी में आज 18वें थारू महोत्सव का उद्घाटन मुख्य अतिथि बगहा एसडीएम शेखर आंनद ने किया.

इस अवसर पर आईएएस शेखर आंनद और थारू नेता महेश काज़ी ने संयुक्त रूप से पौधारोपण कर महोत्सव की विधिवत शुरुआत किया. 

थरुहट की राजधानी हरनाटांड में थारू आदिवासी समाज की ओर से आयोजित महोत्सव में झमटा और बीरहनी जैसे विलुप्त होती लोक सांस्कृतिक रंगारंग कार्यक्रमों की प्रस्तुति विशेष आकर्षण का केंद्र रहा. 

बता दें कि सुदूरवर्ती तराई क्षेत्र में बसे आदिवासी जनजाति को 8 जनवरी 2003 को अनुसूचित जनजाति का दर्ज़ा मिला था इससे पूर्व वर्ष 1971 में थारू कल्याण महासंघ की स्थापना की गई थी. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में थारूओं के उत्थान को लेकर केंद्र सरकार ने इन्हें एसटी श्रेणी का दर्जा दिया. तभी से बिहार के एक मात्र चंपारण के वाल्मीकिनगर संसदीय क्षेत्र के चार विधानसभा क्षेत्रों में करीब ढाई से तीन लाख आबादी वाले थारू आदिवासी अपने छह तपाओं में इस दिन को यादगार बनाते हुए महोत्सव के रूप में मनाते चले आ रहे हैं.

इस मौक़े पर अपने संबोधन में ज़िला प्रशासन की ओर से आईएएस शेखर आंनद ने आदिवासी जनजाति समाज के चौमुखी विकास में सरकारी स्तर पर प्रशासन की ओर से हर संभव मदद देने का भरोसा दिलाया.