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आपदा: बिहार ने मांगे 72 हजार करोड़ से ज्यादा, मिले सिर्फ 2998 करोड़ रुपए

अगर पिछले 10 सालों की बात करें, तो बिहार सरकार ने आपदा के मद में 72557 करोड़ रुपये की मांग केंद्र सरकार से की है

आपदा: बिहार ने मांगे 72 हजार करोड़ से ज्यादा, मिले सिर्फ 2998 करोड़ रुपए
इस साल बिहार ने केंद्र सरकार ने 2700 करोड़ की मांग की है. (फाइल)

शैलेंद्र/पटना: बिहार आपदा प्रभावित राज्य है. हर साल बाढ़ और सुखाड़ की मार से राज्य की ज्यादातर आबादी प्रभावित होती है. देश के सबसे ज्यादा पिछड़े राज्यों में शुमार बिहार हर बार केंद्र सरकार से मदद की गुहार लगाता है, लेकिन मदद के नाम पर बिहार को पर्याप्त राशि किसी साल नहीं मिल पाती है. अगर पिछले 10 सालों की बात करें, तो बिहार सरकार ने आपदा के मद में 72557 करोड़ रुपये की मांग केंद्र सरकार से की है, जिसकी एवज में केंद्र सरकार की ओर से सिर्फ 2998 करोड़ की मदद की गयी है. इस साल भी राज्य के 13 जिलों में बाढ़ आयी, जिसके लिए बिहार ने केंद्र सरकार ने 2700 करोड़ की मांग की है. बिहार को कितनी मदद केंद्र से मिलती है, अभी इसका फैसला आना बाकी है.

दशकों से बिहार में बाढ़ और सुखाड़ की स्थिति रही है. बारिश के समय नेपाल की नदियों से आनेवाला पानी जहां उत्तर बिहार के कोसी, सीमांचल और मिथिलांचल के इलाकों में बाढ़ लाता है, तो दक्षिण बिहार में बारिश नहीं होने से सुखाड़ के हालात बनते हैं. 2017 की तरह 2019 में भी अचानक बहुत बारिश नेपाल के इलाके और बिहार के कुछ जिलों में हुई, जिससे रातोंरात 13 जिले बाढ़ की चपेट में घिर गये. कई बांध टूट गये. सड़कें बह गयीं. घर बह गये. बड़ी त्रासदी आयी. लाखों की आबादी बाढ़ की चपेट में आ गयी. राज्य सरकार की ओर से बाढ़ से बचाव को लेकर अभियान चलाया गया, जिसमें केंद्रीय टीम एनडीआरएफ और राज्य की एसडीआरएफ की मदद के बाढ़ प्रभावित इलाकों से लोगों को निकाला गया. इस दौरान 125 से ज्यादा लोगों की जान चली गयी.

बाढ़ से स्थिति इतनी भयावह थी कि दरभंगा के कुछ इलाकों में हेलीकॉप्टर के जरिये मदद पहुंचानी पड़ी. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहल पर बाढ़ प्रभावितों को फौरी तौर पर राहत पहुंचायी गयी. कम्युनिटी किचेन के जरिये प्रभावित इलाकों के लोगों को सुबह- शाम खाना खिलाया गया. इसके बाद राज्य सरकार ने प्रभावित परिवारों के एकाउंट में छह-छह हजार की राशि भेजनी शुरू की, ताकि बाढ़ से तबाह लोगों को कुछ मदद मिल सके. इसके अलावा फसल क्षति, मवेशी क्षति और मकान के नुकसान पर अलग से मदद दी जा रही है.

2700 करोड़ की मांग की गई
बाढ़ से हुये नुकसान का आकलन कर राज्य सरकार की ओर से केंद्र सरकार को रिपोर्ट भेजी गयी है, जिसमें 2700 करोड़ की मांग की गयी है. राज्य सरकार के प्रतिवेदन के आधार पर केंद्र सरकार ने छह सदस्यीय टीम बिहार भेजी है, जो बाढ़ प्रभावित जिलों का दौरा कर रही है. टीम की रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार की ओर से मदद का ऐलान किया जायेगा, लेकिन पिछले सालों के आकड़ों पर गौर करें, तो जिस तरह से केंद्र सरकार से मदद मिलती रही है, उसका ट्रैक रिकार्ड ज्यादा अच्छा नहीं रहा है. कोसी में बाढ़ के समय भी केंद्र की ओर से राज्य सरकार को सिर्फ एक हजार करोड़ की मदद दी गयी थी, जबकि राज्य सरकार की ओर से 14 हजार करोड़ से ज्यादा की मांग की गयी थी. अभी तक सबसे ज्यादा राशि 2017 में बिहार को 1363 करोड़ रुपये मिली है, जो 7636 करोड़ मांग की एवज में मिली थी.

किस साल कितनी मदद मांगी, मिली कितनी
2008- केंद्र से मांगे 14808 करोड़, मिले- 1000 करोड़
2009- केंद्र से मांगे 23071 करोड़, मिले- 267 करोड़
2010- केंद्र से मांगे 5182 करोड़, मिले- 368 करोड़
2013 - केंद्र से मांगे 12564 करोड़, कोई सहायता नहीं मिली
2015- केंद्र से मांगे 2475 करोड़, कोई सहायता नहीं मिली
2016 - केंद्र से मांगे 4111 करोड़, कोई मदद नहीं मिली
2017 - केंद्र से मांगे 7636 करोड़, मिले- 1363 करोड़
2019- केंद्र से मांगे 2700 करोड़, अभी फैसला आना बाकी

बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहनवाज हुसैन ने कहा कि केंद्र सरकार की बिहार पर विशेष नजर है. राज्य को अतिरिक्त मदद केंद्र सरकार की ओर से दी जा रही है, जहां तक बाढ़ के समय केंद्र से किसी के नहीं आने का सवाल है, तो बिहार के तमाम मंत्री केंद्र सरकार में शामिल हैं, वो अपने इलाकों का दौरा कर रहे थे.     

बिहार के आपदा प्रबंधन मंत्री लक्ष्मेश्वर राय का कहना है कि   केंद्र सरकार केंद्रीय टीम की रिपोर्ट के आधार पर मदद का हाथ आगे बढ़ायेगी. अभी टीम आयी है, जिलों का जायजा ले रही है और लौट कर जो रिपोर्ट देगी, उसी के आधार पर केंद्रीय मदद मिलेगी. रही बात केंद्रीय मदद की, तो बिहार पर केंद्र की ओर से विशेष ध्यान दिया जा रहा है.

कांग्रेस नेता राजेश राठौर ने अपने बयान में कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार डबल इंजन सरकार के लिए ही महागठबंधन तोड़ कर भाजपा के साथ गये थे. अब वहां भी उन्हें मदद नहीं मिल रही है, तो समझ सकते हैं. सच्चाई ये है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कोई बात केंद्र सरकार नहीं मान रही है. पटना विश्वविद्यालय के मुद्दे में हम लोग ये देख चुके हैं. अगर मदद नहीं मिल रही है, तो नीतीश कुमार को भाजपा का साथ छोड़ कर बाहर आना चाहिये.