झारखंड: 4 माह से थमे बसों की रफ्तार पर चूहों की मार, टैक्स भुगतान में छूट नहीं दे रही सरकार

सरकार से मांग करते हैं कि बस संचालकों को परिचालन शुरू करने से पहले आर्थिक मदद की घोषणा किया जाए और टैक्स को माफ कर दिया जाए.

झारखंड: 4 माह से थमे बसों की रफ्तार पर चूहों की मार, टैक्स भुगतान में छूट नहीं दे रही सरकार
झारखंड: 4 माह से थमे बसों की रफ्तार पर चूहों की मार, टैक्स भुगतान में छूट नहीं दे रही सरकार.

रांची: झारखंड में चार महीने से बसों की रफ्तार थमी हुई है लेकिन बस संचालकों को अनलॉक 3 में कुछ शर्तों के साथ बसों के संचालन की छूट की उम्मीद थी. हालांकि बढ़ते संक्रमण ने फिर एक बार उनके उम्मीदों पर ब्रेक लगा दिया है. सरकार से आर्थिक सहायता की कर रहे हैं मांग

बस संचालकों को अब तक नहीं मिली राहत
बस संचालकों की मानें तो झारखंड के प्रवासी मजदूर और अन्य नागरिक जब लॉकडाउन के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में फंसे हुए थे, तो उन्हें वापस लाने में बस संचालकों ने अहम भूमिका निभाई. इन्हीं बस संचालकों को सरकार से राहत तक नहीं मिल रही है.

अनलॉक 3 में शर्तों के साथ बस चलाने की उम्मीद थी, लेकिन अब उस उम्मीद पर भी पानी फिर गया है. चार महीने से अधिक समय तक कारोबार बंद होते हुए भी टैक्स देना पड़ रहा है. जबकि, इसी कार्यकाल में दूसरे राज्यों ने बस ऑपरेटरों को टैक्स भुगतान से माफी तक दी है. 

बिहार में बस ऑपरेटरों को टैक्स भुगतान में छूट
उत्तराखंड में पहली तिमाही को पूरी तरह से टैक्स फ्री रखा गया है, जबकि इसके बाद के तीन तिमाही में 75 से 25 प्रतिशत तक छूट दी गई है. बिहार में भी कैबिनेट ने बस ऑपरेटरों को टैक्स भुगतान में छूट देने का निर्णय लिया है. पंजाब, हरियाणा और छत्तीसगढ़ में भी बस संचालकों को राहत दी गई है. लेकिन, झारखंड में राहत नहीं मिल सकी है.

सरकार से मांग करते हैं कि बस संचालकों को परिचालन शुरू करने से पहले आर्थिक मदद की घोषणा किया जाए और टैक्स को माफ कर दिया जाए.

बड़े-बड़े चूहों ने काट लिए हैं सीट-बिजली के तार
बस संचालकों की मानें तो 4 महीने से एक जगह पर बसों के खड़े रहने से सभी टायर खराब हो चुके हैं. गाड़ी के अंदर पेड़ पौधे उगाए हैं और बड़े-बड़े चूहों ने सीट और बिजली के वायर को काट दिया है जिससे लाखों का नुकसान हुआ है. ऐसे में फिर से परिचालन शुरू करने से पहले एक बस में डेढ़ से 2 लाख रुपये खर्च करने होंगे जो कि अब संभव नहीं है. क्योंकि सारे पैसे खर्च हो चुके हैं. 

भूखे मरने की कगार पर पहुंच चुके हैं बस स्टाफ
अब इस वजह से कई बस मालिक आत्महत्या करने को भी तैयार हैं. कई ने कर भी लिया है. सोशल डिस्टेंसिंग के पालन के साथ बसों के परिचालन का इजाजत सरकार को देना चाहिए जिससे बस संचालक समेत जो इस व्यवसाय से जुड़े लोग हैं. उनका परिवार चल सके भूखे मरने की कगार पर सभी पहुंच चुके हैं.

अन्य मदों में सरकार ने दी है छूट
झारखंड बस ऑनर्स एसोसिएशन के सच्चिदानंद सिंह के अनुसार दूसरे राज्यों में रोड टैक्स एवं अन्य मदों में सरकार ने छूट दी है. लेकिन, झारखंड में ऑपरेटरों की कोई सुध नहीं ली जा रही. जुर्माना नहीं लेने की घोषणा अप्रैल में हुई और इससे एनआइसी के माध्यम से लागू कराने में दो महीने का वक्त लग गया. 

इस दौरान लोगों ने एडवास टैक्स और जुर्माना अदा भी किए हैं, जिसकी भरपाई कब होगी कहा नहीं जा सकता. सरकार को लॉकडाउन की घोषणा के साथ ही बसों को राहत देने की घोषणा भी करनी चाहिए थी. आखिर सरकार के आदेश से ही बसों का संचालन पूरी तरह से बंद है.