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पटना: जलजमाव के बाद बेकार हुई करोड़ों की मशीन, टल रहा मरीजों का ऑपरेशन

15 दिनों तक राजधानी पटना जलजमाव का शिकार रही जिसकी वजह से बिहार के हजारों लोग जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करते दिखे. सैकड़ों की संख्या में ऐसे मरीज थे जिनका ऑपरेशन जलजमाव के कारण टल गया. 

पटना: जलजमाव के बाद बेकार हुई करोड़ों की मशीन, टल रहा मरीजों का ऑपरेशन
कुछ मशीनों को काम करने में लंबा समय लग सकता है.

पटना: बिहार में पटना में बारिश और जलजमाव तो खत्म हो चुके हैं लेकिन इसके तबाही के निशान साफ देखे जा सकते हैं. 15 दिनों तक राजधानी पटना जलजमाव का शिकार रही जिसकी वजह से बिहार के हजारों लोग जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करते दिखे. सैकड़ों की संख्या में ऐसे मरीज थे जिनका ऑपरेशन जलजमाव के कारण टल गया. बारिश और जलजमाव खत्म होने के साथ ही पटना में बिहार भर के मरीज आने लगे हैं लेकिन उन्हें अब ऑपरेशन के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है.

47 साल की किशोरी के पेट का ऑपरेशन तीन दिन पहले हुआ है. किशोरी बिहार के जमुई जिले से है. उसका ऑपरेशन अक्टूबर में होना था लेकिन किशोरी और उसके रिश्तेदार जलजमाव के चलते राजधानी पटना नहीं पहुंच सकते थे. किशोरी के रिश्तेदार राहुल के मुताबिक, वो जमुई में लगातार टीवी और अखबारों के माध्यम से पटना के जलजमाव की खबरें सुन रहे थे लिहाजा वो यहां आने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे. ये हकीकत सिर्फ किशोरी की ही नहीं बल्कि बिहटा की रहने वाली मीना का भी है.

उसे भी किडनी में शिकायत है. लेकिन बिहटा से पटना पहुंची मीना को निराश लौटना पड़ा है. वजह जिन मशीनों के जरिए मीना के पूरे पेट की जांच होनी थी वो मशीन जलजमाव में 10 दिन तक रहने के कारण काम नहीं कर रही हैं. दरअसल पटना और बिहार के लोगों को राजधानी में जलजमाव के साइड इफेक्ट्स का एहसास होने लगा है.पटना का राजेंद्र नगर और कंकड़बाग इलाका जलजमाव का सबसे भीषण शिकार हुआ. और ये दोनों इलाके ऐसे हैं जहां पटना के ही नहीं बल्कि बिहार के जाने माने ड़ॉक्टर रहते हैं. इन इलाकों में हजारों मरीजों का रोजाना इलाज होता है लेकिन 28 से 30 सितंबर तक तीन दिनों की बारिश इन पर कहर बन कर टूटी.

patna water logging

बारिश के बाद इन इलाकों में 10 अक्टूबर तक जलजमाव रहा जिससे यहां के लोग न बाहर जा सकते थे और न बाहर के लोग यहां आ सकते थे.जलजमाव की जद में सिर्फ मरीज ही नहीं बल्कि जिन औजारों के जरिए मरीजों की जांच और ऑपरेशन होना था वो भी अब काम नहीं कर रहे हैं. पटना में कई ऐसे जांच सेंटर हैं जहां एमआरआई, सिटी स्कैन, एक्सरे मशीन, कंप्यूटेड रेडियोग्राफी, एनॉलॉग मेमोग्राफी सहित करोड़ी की मशीन खराब हो चुकी हैं. कुछ को मरम्मत किया जा रहा है तो कुछ मशीनों को काम करने में लंबा समय लग सकता है. पटना में स्पेशलिस्ट डॉक्टर होने के नाते यहां बिहार के साथ-साथ दूसरे राज्यों से भी मरीज इलाज के लिए आते हैं. 

लेकिन जांच मशीन खराब होने के कारण इन्हें निराश लौटना पड़ा है. राजेंद्र नगर में अनेकों जांच घर और डॉक्टरों के क्लिनिक है जो फिलहाल बंद हैं या फिर मरीजों की संख्या यहां कम हो गई है. डॉक्टरों के मुताबिक,अब ये मशीन कब काम करेगी ये निश्चित तौर से नहीं कहा जा सकता है. नेशनल मेडिकल काउंसिल यानि एनएमसी के मेंबर डॉक्टर सहजानंद प्रसाद सिंह के मुताबिक, जलजमाव खत्म होने के बाद मरीजों की संख्या में अचानक इजाफा हो गया है. 

लेकिन क्लिनिक के इक्वीपमेंट्स खराब हो चुके हैं. लेकिन जांच नहीं होने के कारण मरीजों को लौटना पड़ा है. पटना में आई स्पेशलिस्ट के तौर पर मशहूर डॉक्टर प्रभात शंकर भी राजेंद्र नगर में साल 1966 से रहते हैं. प्रभात शंकर के मुताबिक, जलजमाव के कारण करोड़ों का नुकसान हुआ है ये प्राकृतिक आपदा नहीं बल्कि मेन मेड डिजास्टर था.28 से 30 सितंबर की बारिश और उसके बाद जलजमाव ने पटना को भारी जख्म दिए हैं. जिंदगी कितनी भी बेरहम हो उसे जीना पड़ता है. शायद इसी फलसफे के सहारे पटना के लोग जी रहे हैं. जलजमाव से चाहे जिंदगी हो या कारोबार या व्यापार या मरीज हर कोई इससे प्रभावित हुआ है.