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बिहार: सुपौल के अस्पताल के प्रसव रूम के गद्दों में लगे कीड़े, मां-बच्चों को इंफेक्शन का खतरा

सुपौल जिला सदर अस्पताल में प्रसव करवाने वाली मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है. यहां के मातृ कक्ष में जर्जर संसाधनों से जच्चा बच्चा दोनों को संक्रमण रोग का खतरा बना रहता है. 

बिहार: सुपौल के अस्पताल के प्रसव रूम के गद्दों में लगे कीड़े, मां-बच्चों को इंफेक्शन का खतरा
स्वास्थ्य विभाग के बड़े अधिकारी मामले में निदेश देने की सिर्फ दलील देने में जुटे हैं.

सुपौल: बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने का सरकार भले दावे करे लेकिन सुपौल जिला सदर अस्पताल में प्रसव करवाने वाली मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है. यहां के मातृ कक्ष में जर्जर संसाधनों से जच्चा बच्चा दोनों को संक्रमण रोग का खतरा बना रहता है. इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग के बड़े अधिकारी मामले में निदेश देने की सिर्फ दलील देने में जुटे हैं.

गद्दे इतने पुराने है कि इसमें कीड़े तक लग गए हैं. बिस्तर पर ब्लड जमा हो जाने से जो प्रसव करवाने वाली महिला रोगियों और नवजात शिशु के लिए संक्रमण रोग लगने का खतरा बढ़ गया है. यही नहीं एक ही बेड पर दो-दो मरीजो को एलॉट किया गया है जिस पर मरीज लेटे रहने के लिए मजबूर हैं.

 

इंफेक्शन होने के डर से बचने के लिए अस्पताल में सतरंगी चादर बिछाने की योजना भी फिसड्डी है. यहां अस्पताल की बेड पर चादर तक नहीं बिछाए जाते है. ऐसे में मरीज के परिजन खुद बेड पर अपना बिस्तर लगाकर लेटते हैं जबकि परिजनों का आरोप है कि वो अस्पताल प्रबंधन से चादर या बिस्तर मांगने पर कर्मियों द्वारा फटकार दिया जाता है.

वहीं, इस मामले को लेकर समाज सेवी ने भी आवाज बुलंद करते हुए स्वास्थ्य विभाग के बदरंग तस्वीर को बदलने की मांग नए सिविल सर्जन से कर रहे हैं. वहीं, स्वास्थ्य महकमा के सबसे बड़े अधिकारी सिविल सर्जन भी अस्पताल की कमी को स्वीकारते हुए जल्द निर्देश देने की बात कह रहे हैं. 

सरकार स्वास्थ्य विभाग पर सबसे अधिक पैसा बरसाती है लेकिन वह पैसा आखिर कहां जाता है. हुक्मरान बदनजरी की वजह से मरीजो की जान भी खतरे में है. देखना होगा कि कब मरीजों को इन जर्जर व्यवस्था से निजात मिलती है.