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बुर्के में आई 'स्टूडेंट ऑफ द ईयर' ने दीक्षांत में यूनिफॉर्म पहनने से किया इनकार, नहीं मिली डिग्री

 5 साल बाद आयोजित ग्रेजुएशन सेरेमनी में 63 छात्रों को गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया लेकिन चर्चा 'ओवर ऑल बेस्ट ग्रेजुएट' निशाद फातिमा को लेकर हो रहा है.

बुर्के में आई 'स्टूडेंट ऑफ द ईयर' ने दीक्षांत में यूनिफॉर्म पहनने से किया इनकार, नहीं मिली डिग्री
बुर्के में पहुंची छात्रा को जब यूनिफार्म पहनने को कहा गया तो वह बगैर डिग्री लिए ही लौट गई.

रांची: झारखंड के रांची विश्वविद्यालय के मारवाड़ी कॉलेज के ग्रेजुएशन सेरेमनी आयोजित की गई जिसमें कई छात्र-छात्राओं को डिग्रियां और गोल्ड मेडल दिया गया. 5 साल बाद आयोजित ग्रेजुएशन सेरेमनी में 63 छात्रों को गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया लेकिन चर्चा 'ओवर ऑल बेस्ट ग्रेजुएट' निशाद फातिमा को लेकर हो रहा है. बुर्के में पहुंची छात्रा को जब यूनिफार्म पहनने को कहा गया तो वह बगैर डिग्री लिए ही लौट गई

रांची विश्वविद्यालय के कॉन्वोकेशन में मारवाड़ी कॉलेज का ग्रेजुएशन सेरिमनी चल रहा था कुलाधिपति द्रौपदी मुर्मू टॉप ग्रेजुएट को सम्मानित करने मंच पर थी. सबसे पहले ओवरऑल बेस्ट ग्रैजुएट निशात फातिमा का नाम पुकारा गया. 93.50 परसेंट लाने वाले निशात बुर्का पहने गोल्ड मेडल और सर्टिफिकेट लेने स्टेज के पास जैसे ही पहुंची उन्हें सेरेमनी के लिए निर्धारित ड्रेस कोड में आने को कहा गया लेकिन निशात बगैर बुर्का पहने मेडल लेने से इनकार कर दिया और वापस लौट गई. मामले पर रांची विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर का कहना है कि इस मामले पर बेहतर जवाबदेही मारवाड़ी कॉलेज की होगी और इस पर भी कुछ भी नहीं कहना चाहते.

वहीं, ओवर ऑल बेस्ट ग्रेजुएट निशात फातिमा के बारे में बताते हुए उनके विभाग के अध्यक्ष बताते हैं कि रांची यूनिवर्सिटी की तरफ से निर्धारित ड्रेस कोड में ही डिग्री दिया जाना था और जो कि निषाद ने ड्रेस कोट पहनने से इनकार किया इसलिए प्रोटोकॉल के तहत उसे डिग्री नहीं दी गई लेकिन वह कभी भी कॉलेज आ कर अपना गोल्ड मेडल और डिग्री ले सकती हैं

ओवरऑल बेस्ट ग्रेजुएट को नकाब की वजह से सम्मानित नहीं किया जाना कई छात्राओं को गवारा नहीं गुजर रहा है. उनका कहना है कि भले ही लोग बेटी बढ़ाओ बेटी बचाओ की बात करते हैं लेकिन सिर्फ बुर्के की वजह से उनको सम्मान नहीं देना गलत है. जबकि कुछ छात्र इससे कॉलेज की मजबूरी बताते हुए कह रहे हैं कि इस मामले पर किसी को भी गलत ठहराना शायद जायज नहीं होगा.