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पटना बारिश: नीतीश कुमार के साथ-साथ BJP के इन 9 नेताओं से भी पूछें सवाल

मीडिया से लेकर सोशल मीडिया में बिहार सरकार के मुखिया नीतीश कुमार (Nitish Kumar) लगातार सवालों के घेरे में हैं. सवाल होना भी लाजमी है, क्योंकि बिहार की सत्ता पर बीते 14 वर्षों से वह काबिज हैं. 

पटना बारिश: नीतीश कुमार के साथ-साथ BJP के इन 9 नेताओं से भी पूछें सवाल
बिहार की राजधानी पटना के मेयर से लेकर सांसद तक बीजेपी से ताल्लुक रखते हैं.

पटना : मूसलाधार बारिश (Patna Rain) से बिहार की राजधानी पटना में त्राहिमाम की स्थिति उत्पन्न हो गई थी. आम से लेकर खास, इस समस्या से कई दिनों तक जूझते रहे. अभी भी कई इलाकों में पानी है. मशहूर गायिका शारदा सिन्हा और बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी (Sushil Modi) को एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की मदद से रेस्क्यू कर बाहर निकाला गया. शहर के राजेंद्र नगर और कंकड़बाग कॉलोनी जलजमाव से ज्यादा प्रभावित थी. इन दो मोहल्लों में इमरजेंसी जैसे हालात बन गए थे. जब समस्या इतनी बड़ी हो तो भला राजनीति क्यों परहेज. उसमें भी राजनीतिक रूप से संवेदनशील बिहार जैसे राज्य में तो लड़ाई और भी रोचक हो जाती है.

मीडिया से लेकर सोशल मीडिया में बिहार सरकार के मुखिया नीतीश कुमार (Nitish Kumar) लगातार सवालों के घेरे में हैं. सवाल होना भी लाजमी है, क्योंकि बिहार की सत्ता पर बीते 14 वर्षों से वह काबिज हैं. लेकिन, जब किसी भी शहर में जलजमाव की स्थिति उत्पन्न होती है तो प्राथमिक तौर पर नगर निगम से सवाल किए जाते हैं. शहर की साफ-सफाई की व्यवस्था निगम के जिम्मे है. यहां स्थिति उलट है. पूरे दृश्य से नगर निगम गायब है. नीतीश कुमार पर लगातार हो रहे हमले की आड़ में पटना की मेयर सीता साहू को मीडिया के सवालों से दो-चार होने का मौका नहीं मिल रहा है.

बारिश के मुद्दे पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने तो है ही वहीं, सरकार में शामिल जनता दल युनाइटेड (JDU) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता भी आपस में भिड़ रहे हैं. बीजेपी की तरफ से पार्टी के फायरब्रांड नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह मोर्चा संभाले हुए हैं. वहीं, उनको बीजेपी एमएलसी सच्चिदानंद राय जैसे नेताओं का भी साथ मिल रहा है. अब यह मामला सरकार बनाम विपक्ष से कहीं ज्यादा बीजेपी बनाम जेडीयू का हो गया है. बिहार के मुख्यमंत्री लगातार सवालों के घेरे में हैं. ऐसे में लगे हाथ हमें पटना की मेयर, नगर विकास मंत्री, उपमुख्यमंत्री, दोनों सांसद और चारों विधायकों से भी सवाल पूछना चाहिए. ये सभी जिम्मेदार एक ही पार्टी बीजेपी से आते हैं. यूं कहें तो पटना पर बीजेपी का ही राज है.

सीता साहु, मेयर, पटना नगर निगम
शहर में जल जमाव की स्थिति हो तो प्राथमिक जिम्मेदारी नगर निगम की बनती है. क्योंकि नालों की समुचित सफाई के अभाव के कारण ही शहर से पानी की निकासी नहीं हो पाती है. पटना के अधिकांश हिस्सों में भी ऐसे ही हालात हैं. मुख्य सड़कों को छोड़ दें तो मोहल्लों की स्थिति वही 'ढाक के तीन पात' के बराबर है. साधारण बारिश में भी कई वीआईपी कॉलोनियों में लोग जलजमाव से त्रस्त हो जाते हैं. पटना नगर निगम की बीजेपी समर्थित मेयर सीता साहू हैं. प्रथामिक जिम्मेदारी तो इनकी ही बनती है कि बताएं आखिर कब तक पटना के लोगों को जलजमाव से मुक्ति मिलेगी?

सुरेश शर्मा, नगर विकास मंत्री
नीतीश कुमार की कैबिनेट में नगर विकास मंत्रालय बीजेपी के कोटे में है. मुजफ्परपुर से विधायक सुरेश शर्मा मंत्री हैं. इनके मंत्रालय का काम शहरों का विकास करना है. इनके जिम्मे में शहरों के इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर करना है. पटना बिहार की राजधानी है. लोग स्मार्ट सिटी का सपना संजोए हुए हैं. ऐसे में नगर विकास मंत्री की तो पहली जिम्मेदारी बनती है कि कम से कम राजधानी में व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए. लेकिन परिस्थिति देख तो ऐसा ही कहा जा सकता है कि उन्हें भी कोई खास दिलचस्पी नहीं है.

सुशील मोदी, उपमुख्यमंत्री
वरिष्ठ बीजेपी नेता सुशील मोदी बिहार सरकार में उपमुख्यमंत्री हैं. वह खुद भी तीन दिनों तक राजेंद्र नगर स्थित अपने पैत्रिक आवास पर जलजमाव के कारण से फंसे रहे. कहा जाता है कि उन्होंने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत जलजमाव के दम पर लड़ाई लड़कर ही की थी. सोशल मीडिया में इन दिनों उनकी पुरानी तस्वीर भी वायरल हो रही है. एक बात अक्सर सुनने को मिलती है कि लोग बदलाव की शुरुआत अपने घरों से करते हैं, लेकिन सुशील मोदी अपने लंबे सियासी सफर में इस काम में असफल दिख रहे हैं. अपने लंबे सियासी सफर में भी इलाके के लोगों को जलजमाव की समस्या का ठोस समाधाना नहीं दे सके.

रविशंकर प्रसाद, सांसद, पटना साहिब
लोकसभा चुनाव के दौरान रविशंकर प्रसाद ने खुद को पटना का बेटा बटाया था. चुनाव जीतने के बाद वह लगातार कई मौकों पर पटना भी आए, लेकिन शायद उनका ध्यान भी इस संभावित आपदा की तरफ नहीं गया. जलजमाव के बीच पटना पहुंचे रविशंकर प्रसाद ने दावा किया है कि उन्होंने जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से बात कर फरक्का बराज के सभी 119 गेट खुलवा दिए हैं. वहीं, लगभग 10 दिन पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पीके मिश्रा से फरक्का बराज के कारण बिहार में गंगा के जलस्तर में हो रही बढ़ोतरी पर बात की थी और कहा गया था कि सभी 109 गेट खोल दिए हैं. बिहार सरकार के जलशक्ति मंत्री संजय झा का भी कहना है कि गंगा में गाद के कारण पटना से फरक्का तक पानी पहुंचने में 9 दिन लगता, इसमें अभी दो दिन शेष हैं. ऐसे में आम जनता के लिए यह तय करना मुश्किल हो गया है कि किसका दावा सही है और किसका गलत?

रामकृपाल यादव, सांसद, पाटलिपुत्र
लोक लेखा समिति और कृषि मंत्रालय की संसदीय समिति की बैठक संपन्न करने के बाद मंगलवार देर शाम रामकृपाल यादव दिल्ली से पटना पहुंचे और जलजमाव से प्रभावित इलाकों में दूध, पानी, चिप्स, बिस्कुट के पैकेट प्रभावितों के बीच में बांटे. लेकिन शायद अपने संसदीय क्षेत्र में समय रहते जलनिकासी की व्यवस्था को दुरुस्त कर लिए होते तो आज लोगों को कम परेशानी होती. रामकृपाल यादव बीजेपी में आने के बाद लगातार दूसरी बार सांसद चुने गए हैं. पहले कार्यकाल में तो उन्होंने केंद्र सरकार में राज्य मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाली.

नंद किशोर यादव, अरुण कुमार सिन्हा, संजीव चौरसिया, नितिन नवीन 
पटना के कुम्हरार की बात करें या फिर पटना साहिब, दीघा और बांकीपुर की, ये सभी विधानसभा क्षेत्र जलजमाव की समस्या से त्रस्त है. इन सभी विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व बीजेपी के नेता ही कर रहे हैं. कई इलाकों में तो लंबे समय से इनका राज है. पटना साहिब से नंद किशोर यादव विधायक हैं, जो कि नीतीश सरकार में पथ निर्माण मंत्री भी हैं. कुम्हरार से अरुण कुमार सिन्हा लगातार कई टर्म से विधायक बनते आ रहे हैं. दीघा और बांकीपुर विधानसभा से संजीव चौरसिया और नितिन नवीन विधायक हैं. ये सभी विधायक बीजेपी से आते हैं, जो कि अपने-अपने क्षेत्रों के लिए जलनिकासी का स्थाई समाधान ढूंढने में विफल ही साबित हुए हैं.

बात यहीं खत्म नहीं होती है. शहर और गांव को साफ रखने की सर्वाधिक जिम्मेदारी जनता की होती है. हम अपने घरों को तो साफ रखते हैं, लेकिन कूड़े को सड़क पर फेंकने से बाज नहीं आ रहे हैं. पटना के लगभग हर ट्रांसफर्मर के नीचे आपको कूड़ा का अंबार दिख सकता है. प्लास्टिक का धड़ल्ले से इस्तेमाल नालियों को जाम करने का सबसे बड़ा कारण है. इसलिए सरकार और जनप्रतिनिधियों को आईना दिखाने के साथ-साथ हमें खुद के अंदर भी झांकने की जरूरत है.