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दरभंगा के इस गांव ने जिंदा रखा है फुटबॉल का प्रेम, हर साल होती है प्रतियोगिता

 विजयादशमी को आयोजित प्रतियोगिता के फाइनल मैच में मिलान स्पोर्टिंग क्लब बरौनी, बेगूसराय की टीम ने चंद्रवाना स्पोर्टस क्लब, नाहस, मधुबनी को 5-1 से हराकर खिताब पर कब्जा किया. हरिहरपुर को सैनिकों का गांव भी कहा जाता है. 

दरभंगा के इस गांव ने जिंदा रखा है फुटबॉल का प्रेम, हर साल होती है प्रतियोगिता
यहां हर साल दुर्गापूजा पर राज्य स्तरीय फुटबॉल प्रतियोगिता का आयोजन होता है.

दरभंगा: बिहार में कभी दरभंगा राज को फुटबॉल की नर्सरी माना जाता था. इस शहर में मोहन बागान, ईस्ट बंगाल और मोहम्मडम स्पोर्टिंग जैसे क्लबों के देसी-विदेशी खिलाड़ी खेलने आते थे. अब यह सब नष्ट हो चुका है. शहर में भले ही यह परंपरा खत्म हो गई हो लेकिन इस खेल संस्कृति को पिछले 38 साल से जिंदा रखा है जिले के सिंहवाड़ा प्रखंड के सुदूर स्थित हरिहरपुर गांव ने. 

यहां हर साल दुर्गापूजा पर राज्य स्तरीय फुटबॉल प्रतियोगिता का आयोजन होता है. विजयादशमी को आयोजित प्रतियोगिता के फाइनल मैच में मिलान स्पोर्टिंग क्लब बरौनी, बेगूसराय की टीम ने चंद्रवाना स्पोर्टस क्लब, नाहस, मधुबनी को 5-1 से हराकर खिताब पर कब्जा किया. हरिहरपुर को सैनिकों का गांव भी कहा जाता है. इस गांव में फुटबॉल के खेल और सेना में भर्ती होकर देश की सेवा का जज्बा जुनून की तरह दिखता है.

हरिहरपुर पूर्वी के सरपंच अब्दुल रजाक ने बताया कि मां जगदंबा ग्राउंड, हरिहरपुर उत्तर बिहार का यह एकमात्र ग्राउंड है जिसे फुटबॉल के लायक घास लगाकर मेटेंन रखा जाता है. यहां दुर्गापूजा के अवसर पर 1981 से हर साल राज्य स्तरीय फुटबॉल प्रतियोगिता होती है. उन्होंने बताया कि इस गांव के युवकों में फुटबॉल के साथ सैनिक बनकर देश सेवा में जाने का जुनून भी दिखता है. यहां का शायद ही कोई घर हो जिसमें कोई सैनिक न हो. उन्होंने बताया कि इसी ग्राउंड में प्रैक्टिस कर हर साल 10-12 नौजवान आर्मी, नेवी और एयरफोर्स में भर्ती होते हैं. इसलिए इसे जिले में सैनिकों का गांव भी कहा जाता है.

वहीं, प्रदेश बीजेपी क्रीड़ा मंच के सह संयोजक हेमंत कुमार झा ने सरकार से इस ऐतिहासिक ग्राउंड में स्टेडियम बनाने की मांग की. उन्होंने कहा कि हर प्रखंड में एक स्टेडियम बनाने की सरकार की योजना है, लेकिन स्टेडियम वहां बनना चाहिए जहां खेल के प्रति उत्साह हो. इस लिहाज से हरिहरपुर के ग्राउंड में ही स्टेडियम बनना चाहिए.

वहीं, विजेता टीम मिलान स्पोर्टस क्लब, बरौनी के कप्तान मो. सरफराज आलम ने इस ग्राउंड और यहां के फुटबॉल प्रेमियों की तारीफ की. उन्होंने कहा कि गांव के लोगों ने मैदान को मेंटेन करके रखा है. उत्तर बिहार में ऐसा कोई ग्राउंड नहीं है जिस पर इतनी अच्छी घास हो. उन्होंने देखा कि बारिश के पानी को भी तुरंत सुखा कर मैच शुरू करवाने की तकनीक यहां है. वे पिछले तीन साल से यहां आ रहे हैं. हर साल मैदान ज्यादा बेहतर होता जा रहा है.

बता दें कि इस बार की प्रतियोगिता में राज्य की आठ टीमों मिलान स्पोर्टिंग क्लब बरौनी, साइक्लोन फुटबॉल क्लब मधुबनी, मिथिला स्पोर्टस क्लब दरभंगा, यंग स्टार पटोरी, समस्तीपुर, एलेवन स्टार मोकामा, पटना, हरिहरपुर स्पोर्टस क्लब, दरभंगा, चंद्रवाना स्पोर्ट क्लब नाहस, मधुबनी और एनएससी किशनपुर की टीमों ने शिरकत की थी.