बिहार में कोरोना के 98370 मरीज, अब तक 500 संक्रमित गंवा चुके हैं अपनी जान

बिहार में शुक्रवार को 3911 नए कोरोना के मामले मिले हैं. इसके साथ ही राज्य में कोरोना संक्रमितों की संख्या 98370 पर पहुंच गई है. हालांकि बिहार में अब तक 65307 मरीज स्वस्थ हो कर घर भी लौट चुके हैं.

बिहार में कोरोना के 98370 मरीज, अब तक 500 संक्रमित गंवा चुके हैं अपनी जान
बिहार में कोरोना के 98370 मरीज, अब तक 500 संक्रमित गंवा चुके हैं अपनी जान.

पटना: बिहार में कोरोना के मरीजों की संख्या हुई 98370 ,बिहार में कोरोना के 3,911 नए संक्रमित मरीज मिले,बिहार में अब तक 65307 लोग कोरोना से हुए ठीक,बिहार में कोविड-19 के 32562 एक्टिव मरीज,बिहार में कोरोना रिकवरी रेट 66.39%,बिहार में कोरोना से अबतक 500 लोगों हुई मौत,अबतक बिहार में कोरोना के कुल 1498752 जांच हुए

बिहार में शुक्रवार को 3911 नए कोरोना के मामले मिले हैं. इसके साथ ही राज्य में कोरोना संक्रमितों की संख्या 98370 पर पहुंच गई है. हालांकि बिहार में अब तक 65307 मरीज स्वस्थ हो कर घर भी लौट चुके हैं.

स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक अब भी बिहार में कोरोना सक्रिय मरीजों की संख्या 32562 है. जबकि रिकवरी रेट 66.39 प्रतिशत है. बिहार में कोरोना के कहर से अब तक 500 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं.

बिहार स्वास्थ्य विभाग के सचिव लोकेश कुमार सिंह ने बताया कि राज्य में गुरुवार को 1,04,452 सैंपलों की जांच की गई और अब तक की गयी कुल जांच की संख्या 1498752 है. उन्होंने दावा करते हुए कहा कि बिहार में एक लाख से ज्यादा सैम्पलों की जांच निरंतर जारी रहेगी. सभी मेडिकल कलेजों में ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट की स्थापना प्रक्रियाधीन है.

उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेजों में सभी बेड्स तक और सभी अनुमंडलीय अस्पतालों में अक्सीजन गैस पाइपलाइन की सुविधा सुनिश्चित की जा रही है. इस तरह से टेस्टिंग क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ चिकित्सा गुणवत्ता पर भी फोकस किया जा रहा है.

उल्लेखनीय है कि तीन दिन पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वर्चुअल बैठक में कहा था कि राज्य में कोरोना जांच की क्षमता बढ़ाने की लगातार कोशिश की जा रही है. राज्य में प्रतिदिन एक लाख जांच करने का लक्ष्य रखा गया है.

इधर, राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि राज्य में 11 जुलाई से रैपिड किट से सैंपल की जांच प्रारंभ कर दी गई है. इसके पूर्व आरटीपीसीआर व ट्रूनेट तकनीक से जांच होती आ रही है. उन्होंने दावा करते हुए कहा कि जांच की गति और तेज करने की कोशिश की जा रही है.