झारखंड: चक्रधरपुर में रेलवे ट्रैक मेंटेनर ने सरकार से की सुरक्षा की मांग, बताई अपनी समस्या

झारखंड के चक्रधरपुर में ऑल इंडिया रेलवे ट्रौक मेंटेनर यूनियन का पहला वार्षिक अधिवेशन संपन्न हुआ. ट्रौक मेंटेनर यूनियन के इस वार्षिक अधिवेशन में देश के कोने-कोने से रेलवे ट्रौक मेंटेनर शामिल हुए. अधिवेशन में ऑल इंडिया रेलवे ट्रौक मेंटेनर यूनियन के राष्ट्रिय स्तर के पदाधिकारी मौजूद थे.

झारखंड: चक्रधरपुर में रेलवे ट्रैक मेंटेनर ने सरकार से की सुरक्षा की मांग, बताई अपनी समस्या

चक्रधरपुर: झारखंड के चक्रधरपुर में ऑल इंडिया रेलवे ट्रौक मेंटेनर यूनियन का पहला वार्षिक अधिवेशन संपन्न हुआ. ट्रौक मेंटेनर यूनियन के इस वार्षिक अधिवेशन में देश के कोने-कोने से रेलवे ट्रौक मेंटेनर शामिल हुए. अधिवेशन में ऑल इंडिया रेलवे ट्रौक मेंटेनर यूनियन के राष्ट्रिय स्तर के पदाधिकारी मौजूद थे.

राष्ट्रिय कार्यकारी अध्यक्ष कांता राजू ने अधिवेशन की अध्यक्षता की जबकि खालिदा जिया बतौर मुख्य अतिथि अधिवेशन में शामिल हुई. वार्षिक अधिवेशन में रेलवे के ट्रौक मेंटेनर से जुडी कई समस्याओं पर यूनियन ने मंथन किया. जिसमें ट्रौक मेंटेनर की समस्या और रेलवे का निजीकरण मुख्य रूप से छाया रहा. वहीं संगठन को भी मजबूत करने की चर्चा की गई.

साथ ही बताया गया कि कार्य के दौरान रेलवे ट्रौक मेंटेनर कई समस्याओं का सामना करते हैं, जिसमें दुर्घटना का खतरा और संक्रमण से स्वास्थ्य को हानि होने का खतरा बना रहता है. लेकिन उन्हें किसी तरह का भत्ता नहीं दिया जाता है. सुरक्षित रेल परिचालन के लिए वे पटरियों की सुरक्षा का ख्याल रखते हैं लेकिन रेल मंत्रालय और सरकार उनका ख्याल नहीं रखती. ना तो उन्हें हार्ड ड्यूटी अलाउंस दिया जाता है और ना संक्रमण भत्ता.

रेल अधिकारी ट्रौक मेंटेनर की जान से खिलवाड़ करते हैं, सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर उनसे नियम के विरुद्ध काम लिया जाता है. जिसके कारण कई बार ट्रेन की चपेट में आकर ट्रेक मेंटेनरों की मौत भी हो जाती है. आठ घंटे के बजाये ट्रौक मेंटेनर को 12 घंटा काम कराया जाता है. ट्रौक मेंटेनर के पद पर नियुक्त होने वाला सरकारी कर्मी के लिए प्रमोशन का कोई रास्ता भी नहीं है. जिस पद पर बहाल होते हैं उसी पद पर उन्हें रिटायर होना पड़ता है. इनके जीवन में उत्थान का कोई रास्ता रेल मंत्रालय ने नहीं बनाया है जबकि ट्रौक मेंटेनर के पद पर बेरोजगारी के कारण उच्च स्तरीय शिक्षा ग्रहण करने वाले लोग भी काम कर रहे हैं.

महिला ट्रौक मेंटेनर कर्मचारी के लिए तो इस विभाग में काम करना ही मुश्किल है. कई सारी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझती ट्रौक मेंटेनर महिलाएं पुरुषों के साथ दूर दराज जंगल पहाड़ के बीच रेल पटरी की सुरक्षा में पेट्रोलिंग करना इनके लिए बड़ा मुश्किल होता है. रेल मंत्रालय ने भी महिलाओं को ट्रौक मेंटेनर के काम से अलग रखने को कहा है लेकिन इसके बावजूद कई रेलवे ज़ोन में इसे सख्ती से लागु नहीं किया जा रहा है और महिलाओं को ट्रेक पर भेजा जा रहा है.

अधिवेशन में यूनियन ने ट्रौक मेंटेनर के हित को लेकर कई मांगें रखकर अपनी आवाज़ बुलंद की है. जिनमें ट्रौक मेंटेनर को रिस्क अलाउंस, संक्रमण भत्ता, प्रमोशन देने की मांग की है. वहीं महिलाओं को ट्रौक मेंटेनर के काम से अलग रखने व नए पेंशन स्कीम को निरस्त कर पुराने पेंशन स्कीम को फिर फिर से बहाल करने और रेलवे के निजीकरण को जल्द से जल्द रोकने की मांग की है. अगर सरकार और रेल मंत्रालय इनकी मांगें नहीं मानती है तो जल्द ही यूनियन इसको लेकर देशभर में वृहत पैमाने पर आन्दोलन भी छेड़ने वाली है.