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बोधगया: विशेष पूजा के दौरान आपस में भिड़े दो भिक्षु, काफी मुश्किलों के बाद कराया गया शांत

 महाबोधि मंदिर के परिसर में रविवार को दो बौद्ध भिक्षु हिंसा पर उतर आए. इस मामले में महाबोधि मंदिर के मुख्य पुजारी भिक्षु चालिंदा ने बोधगया थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है.

बोधगया: विशेष पूजा के दौरान आपस में भिड़े दो भिक्षु, काफी मुश्किलों के बाद कराया गया शांत
महाबोधि मंदिर के मुख्य पुजारी भिक्षु चालिंदा ने बोधगया थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है.

बोधगया: भगवान बुद्ध की पावन नगरी तब शर्मसार हो गई, जब बोधगया के विश्वविख्यात महाबोधि मंदिर के परिसर में रविवार को दो बौद्ध भिक्षु हिंसा पर उतर आए. इस मामले में महाबोधि मंदिर के मुख्य पुजारी भिक्षु चालिंदा ने बोधगया थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है.

जानकारी के मुताबिक, महाबोधि मंदिर में रविवार को उस समय अफरातफरी की स्थिति पैदा हो गई जब जब दो बौद्ध भिक्षुओं के बीच जबरदस्त मारपीट हुई. दरअसल, चीवर दान कार्यक्रम के दौरान रविवार को सैकड़ों बौद्ध भिक्षुओं ने महाबोधि मंदिर परिसर में विशेष पूजा की, वहीं पूजा में बैठने को लेकर दो बौद्ध भिक्षु आपस में भीड़ गए. अन्य बौद्ध भिक्षुओं ने हस्तक्षेप कर दोनों को शांत कराया, फिर पूजा शुरू हुई.

 

मारपीट की पुष्टि करते हुए थानाध्यक्ष मोहन कुमार सिंह ने कहा कि पूजा में बैठने को लेकर बौद्ध भिक्षु आपस में लड़ गए. हालांकि दूसरे बौद्ध भिक्षु ने मामले को शांत कराया.

आपको बता दें कि बौद्ध भिक्षुओं के लिए वर्षावास बहुत महत्वपूर्ण है. 16 जुलाई से 13 अक्टूबर तक वर्षावास चलता है. बौद्ध भिक्षु वर्षावास में बौद्ध कुटिया या बौद्ध विहार में आषाढ़ पूर्णिमा से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक रहते हैं.

पूरे तीन माह तक एक वक्त भोजन कर साधना और अध्ययन में लगे रहते हैं. वर्षावास की समाप्ति पर बौद्ध भिक्षु धर्म प्रचार के लिए निकलते हैं. यह परंपरा ढाई हजार साल पुरानी है. वर्षावास समाप्ति के बाद 1 माह तक बौद्ध भिक्षुओं के लिए चीवर दान कार्यक्रम आयोजित किया जाता