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सराहनीय पहल: रांची के पहाड़ी मंदिर में बंद हुआ पॉलिथीन का उपयोग, लोगों को ठोंगे में मिल रहा प्रसाद

रांची के पहाड़ी मंदिर में प्लास्टिक के प्रयोग पर रोक लगा दी गई है. कोई भी दुकानदार श्रद्धालुओं को प्रसाद प्लास्टिक में न देकर कागज या पत्ते में दे रहे हैं.

सराहनीय पहल: रांची के पहाड़ी मंदिर में बंद हुआ पॉलिथीन का उपयोग, लोगों को ठोंगे में मिल रहा प्रसाद
रांची के पहाड़ी मंदिर में पॉलिथिन का उपयोग बंद. (फाइल फोटो)

रांची: झारखंड की राजधानी रांची के पहाड़ी मंदिर में प्लास्टिक के प्रयोग पर रोक लगा दी गई है. पहाड़ी मंदिर के आसपास प्रसाद विक्रेताओं के साथ बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया है. इसके बाद दुकानदारों ने भी प्लास्टिक की जगह कागज के बने थैले में प्रसाद दे रहे हैं.

रांची के पहाड़ी मंदिर में प्लास्टिक के प्रयोग पर रोक लगा दी गई है. कोई भी दुकानदार श्रद्धालुओं को प्रसाद प्लास्टिक में न देकर कागज या पत्ते में दे रहे हैं. दुकानदार ओमकार पांडेय ने कहा कि कागज से बने ठोंगे और डलिया में पूजा की सामग्री देते हैं. श्रद्धालु जब पूजा कर वापस आते हैं तो ठोंगा वापस कर देते हैं. उन्होंने कहा कि हम पहले से भी प्लास्टिक के उपयोग नहीं कर रहे हैं. 

दुकानदार राजेश्वर ने कहा कि देश हित में और पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान को हम लागू कर रहे हैं. श्रावण मास से ही प्लास्टिक का प्रयोग वर्जित कर दिया गया है. प्लास्टिक हमारे धर्म के हिसाब से शुद्ध नहीं माना जाता है. इसलिए हम प्लास्टिक की जगह कागज के बने ठोंगे में फूल और प्रसाद देते हैं. ग्राहकों की सुविधा के लिए नारियल को निकालकर ठोंगा में देते हैं. साथ ही उनसे यह भी अनुरोध करते हैं कि अगली बार घर से ठोंगा लेकर आएं.

पूजा करने पहुंचे श्रद्धालुओं ने प्लास्टिक के उपयोग पर रोक को सराहनीय कदम बताया है. उन्होंने कहा कि इसका उपयोग सही नहीं है. इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है. उन्होंने कहा कि सिर्फ मंदिर ही नहीं पूरे समाज से ही प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगा देनी चाहिए. प्लास्टिक समाज के लिए कोढ़ है.

लोगों का कहना है कि प्लास्टिक का विकल्प भी ढूंढ़ना होगा. बिना विकल्प प्रतिबंध करेंगे को स्थाई नहीं रहेगा. दो-चार दिन के बाद फिर से चालू हो जाएगा. प्लास्टिक की फैक्ट्री को बंद करने की आवश्यक्ता है.