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बिहार: शिलान्यास के 7 महीने बाद भी नहीं हुआ टेंडर, सड़क से गुजरने से पहले ड्राइवर करते हैं पूजा

शिलान्यास के सात महीने बाद भी टेंडर नहीं हुआ है. शिलान्यास भी कोई और नहीं, बल्कि बिहार के पथ निर्माण मंत्री नंद किशोर यादव ने किया था.

बिहार: शिलान्यास के 7 महीने बाद भी नहीं हुआ टेंडर, सड़क से गुजरने से पहले ड्राइवर करते हैं पूजा
सड़क से सही सलामत गुजरने के लिए ड्राइवर करते हैं पूजा.

मोतिहारी: बिहार के मोतिहारी (Motihari) में एक ऐसी सड़क है, जहां से गुजरने से पहले ड्राइवर पहले मंदिर में सलामती की दुआ करता है. उसके बाद ही यात्रियों को लेकर गंतव्य की तरफ जाते हैं. इस सड़क की एक और दिलचस्प कहानी है कि बिना टेंडर ही इसका शिलान्यास कर दिया गया. शिलान्यास के सात महीने बाद भी टेंडर नहीं हुआ है. शिलान्यास भी कोई और नहीं, बल्कि बिहार के पथ निर्माण मंत्री नंद किशोर यादव (Nand Kishore Yadav) ने किया था.

सड़क को देख आपको देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहार वाजपेयी का वह बयान याद आ जाएगा, जब 2005 के विधानसभा चुनाव के दौरान वह अक्सर कहा करते थे, 'बिहार में यह फर्क कर पाना मुश्किल है कि सड़क में गड्ढ़े हैं या गड्ढ़े में सड़क.'

तीन जिलों को जोड़ने वाली यह सड़क वाल्मीकि की तपो भूमि वाल्मीकि नगर से नरकटियागंज, सिकटा, भेलाही, रक्सौल, घोड़ासहन होते हुए मां जानकी की जन्मभूमि सीतामढ़ी तक जाती है. इसे घोड़ासहन कैनाल पथ के नाम से जाना जाता है. सड़क मार्ग से दो धर्मीक स्थलों का सीधा जुड़ाव है. वहीं, पूर्वी यूपी से पश्चमी बिहार तक आने की दूरी को भी कम करता है. लेकिन पथ निर्माण विभाग की उदासीन रैवये से सड़क झील में तब्दील हो गया है. जगह-जगह बड़े गड्ढ़े बन गए हैं.

इस सड़क से सकुशल यात्रा करने वाले वाहन चालक सबसे पहले मंदिर में भगवान हनुमान की पूजा-अर्चना करते हैं, फिर गंतव्य की ओर जाते हैं. रमेश शाह नामक ऑटो चालक का कहना है कि सड़क इतनी जर्जर है कि हल्की सी बारिश में ही झील बन जाती है. लोकसभा चुनाव से पहले सड़क निर्माण के लिए पथ निर्माण मंत्री के द्वारा शिलान्यास भी  किया गया था, लेकिन आज तक एक भी ईंट नहीं रखी जा सकी है.

-- Rashmi Sharma, News Desk